सऊदी अरब में अफगान तालिबान–पाकिस्तान वार्ता हुई नाकाम, फिर बढ़ा तनाव
इस्लामाबाद/काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की लगातार कोशिशें असफल होती जा रही हैं। बीते दिनों सऊदी अरब में तालिबान और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक भी किसी सकारात्मक नतीजे के बगैर समाप्त हो गई। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीमा पर संघर्ष की आशंकाएं एक बार फिर गहरा गई हैं।
अफगानी मीडिया आउटलेट अफगान इंटरनेशनल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि तालिबान का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए सऊदी अरब पहुंचा था। इस टीम में अफगान उप गृह मंत्री रहमतुल्लाह नजीब, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी, और तालिबान शूरा के वरिष्ठ सदस्य अनस हक्कानी शामिल थे। बताया गया है कि सऊदी अरब ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से मध्यस्थता में रुचि दिखाई थी।
इस्तांबुल की वार्ताएं भी रहीं बेनतीजा
इससे पहले तुर्की के इस्तांबुल में अफगान तालिबान और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी, जिनमें कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में तीन दौर हुई बातचीत में शुरुआती बैठक दोहा में हुई थी, जहां दोनों देशों ने अस्थाई सीजफायर पर सहमति जताई थी। हालांकि, इसके बाद के दौर बगैर परिणाम के समाप्त हुए।
तालिबान ने सऊदी अरब में हुई ताज़ा बैठक पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी चुप्पी साध रखी है। लेकिन वार्ता के असफल रहने से यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की खाई और गहरी हो चुकी है।
जंग का खतरा बढ़ा, सीमा पर तैनातियां तेज
अक्टूबर के महीने में अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच गंभीर झड़पें हुई थीं। पिछले महीने के अंत में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में कथित एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान सरकार बेहद नाराज़ है और पाकिस्तान को “बदला लेने” की चेतावनी दे चुकी है।
अफगान तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान अफगान सीमा क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई कर रहा है, जबकि पाकिस्तान की दलील है कि वह TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के ठिकानों को निशाना बना रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डूरंड लाइन पर दोनों देशों ने भारी हथियारों की तैनाती बढ़ाई है और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस कारण आशंका जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच कभी भी तनाव बड़े संघर्ष में बदल सकता है।
कूटनीति की कोशिशें विफल, हालात बेहद संवेदनशील
सऊदी अरब की मध्यस्थता भी विफल होने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। तुर्की और क़तर की कोशिशें पहले ही असफल हो चुकी हैं। यदि पाकिस्तान और तालिबान जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचते, तो दक्षिण एशिया का यह पूरा इलाका अस्थिरता की चपेट में आ सकता है।
फिलहाल, दोनों देशों की सरकारों ने वार्ता जारी रखने की इच्छा तो जताई है, लेकिन जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
