एनएसई ने बनाया रिकॉर्ड: 24 करोड़ यूनिक ट्रेडिंग अकाउंट पार
नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एक बड़ा माइलस्टोन हासिल किया है। एक्सचेंज ने 240 मिलियन (24 करोड़) यूनिक ट्रेडिंग अकाउंट्स पार कर लिए हैं—यह उपलब्धि पिछले साल अक्टूबर 2024 में 20 करोड़ का आंकड़ा पार करने के ठीक एक साल बाद दर्ज की गई है।
राज्यों के अनुसार निवेशक आधार: महाराष्ट्र सबसे आगे
31 अक्टूबर 2025 तक NSE पर 12.2 करोड़ यूनिक रजिस्टर्ड निवेशक थे। राज्यवार निवेशक आधार इस प्रकार है:
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महाराष्ट्र — 4 करोड़+ (17%)
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उत्तर प्रदेश — 2.7 करोड़
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गुजरात — 2.1 करोड़
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पश्चिम बंगाल — 1.4 करोड़
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राजस्थान — 1.4 करोड़
केवल शीर्ष 5 राज्य 49% निवेशक खातों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि शीर्ष 10 राज्य मिलकर 73% खाते रखते हैं।
NSE: यह बढ़ोतरी क्यों हुई?
NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन ने इस ग्रोथ का श्रेय दिया:
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नियामक सुधारों को
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मोबाइल ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी को
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आसान व पेपरलेस e-KYC को
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निवेशक जागरूकता अभियानों को
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों ने टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों में भी बाजारों को ज्यादा सुलभ और भरोसेमंद बनाया है।
रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी—22 साल का उच्चतम स्तर
30 सितंबर 2025 तक:
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NSE-लिस्टेड कंपनियों में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी 18.75% पहुँच गई
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यह 22 वर्षों का सर्वोच्च स्तर है
पिछले 5 साल का रिटर्न:
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Nifty 50 → 15% CAGR
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Nifty 500 → 18% CAGR
यह निरंतर रिटर्न रिटेल भागीदारी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
निवेशक शिक्षा अभियान में तेजी
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में NSE ने:
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11,875 निवेशक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए
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जिनमें 6.2 लाख से ज्यादा प्रतिभागी जुड़े
यह संख्या FY25 के पूरे वर्ष हुए 14,679 कार्यक्रमों को भी पीछे छोड़ती नजर आ रही है। इस बीच, अक्टूबर 2025 के अंत तक NSE का निवेशक संरक्षण कोष (IPF) 19% बढ़कर ₹2,719 करोड़ पर पहुँच गया।
दुनिया का नंबर-1 डेरिवेटिव एक्सचेंज
1994 में स्थापित एनएसई:
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ट्रेडिंग वॉल्यूम के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज
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2024 में दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज (FIA रिपोर्ट के अनुसार)
यह उपलब्धि भारत के तेजी से बढ़ते कैपिटल मार्केट का मजबूत संकेत देती है।
