दिल्ली धमाका: जान गंवाने वाले आठ लोग कौन

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली सोमवार की शाम एक भयावह हादसे से दहल उठी। लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी एक कार में हुए धमाके में कम से कम आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि मृतकों में अधिकांश ई-रिक्शा और कैब ड्राइवर थे, जो अपने रोज़मर्रा के काम में व्यस्त थे या किसी का इंतज़ार कर रहे थे।

मृतकों की पहचान

पुलिस ने जिन आठ मृतकों की पहचान की है, वे हैं — मोहम्मद जुम्मन, मोहसिन मलिक, दिनेश मिश्रा, लोकेश अग्रवाल, अशोक कुमार, नोमान, पंकज साहनी और अमन कटारिया। इनमें से ज़्यादातर लोग दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार से ताल्लुक रखते थे।

मोहसिन मलिक- ई-रिक्शा चालक

मोहसिन मलिक, मेरठ के रहने वाले थे और कई सालों से दिल्ली में ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुज़ारा करते थे। सोमवार शाम वह लाल क़िले के पास ही सवारी का इंतज़ार कर रहे थे, जब धमाका हुआ। पुलिस को उनका मोबाइल फ़ोन सड़क पर पड़ा मिला। एलएनजेपी अस्पताल पहुंचने पर परिवार को बताया गया कि मोहसिन की मौत हो चुकी है। अस्पताल के बाहर उनकी बहन फूट-फूट कर रोती हुई बोलीं — “मेरा भाई चला गया… अब उसके बच्चों को कौन देखेगा? भाभी को क्या बताऊं?” मोहसिन शादीशुदा थे और दो छोटे बच्चे हैं।

दिनेश मिश्रा — चावड़ी बाज़ार का मेहनती कामगार

35 वर्षीय दिनेश मिश्रा, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के रहने वाले थे। वे चावड़ी बाज़ार में शादी के कार्ड की दुकान पर काम करते थे। उनके भाई गुड्डू मिश्रा ने बताया — “रात सवा ग्यारह बजे फ़ोन उठाने वाले ने कहा कि लोकनायक अस्पताल पहुंचो। वहां तीन बजे जाकर भाई की बॉडी देखी। उसे पहचानना मुश्किल था।” दिनेश अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।

जुम्मन — ई-रिक्शा चालक, पाँच बच्चों का पिता

मोहम्मद जुम्मन, बिहार के मूल निवासी थे, कई सालों से दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में रहते थे। वह रोज़ाना लाल क़िले क्षेत्र में ई-रिक्शा चलाते थे। धमाके में उनका शव इतनी बुरी तरह क्षत-विक्षत हुआ कि परिवार को पहचानने में दिक्कत हुई। परिजनों ने बताया — “हमने कपड़ों से उन्हें पहचाना। न सिर था, न पैर… बस कपड़े बचे थे।” उनकी पत्नी और पाँचों बच्चे गहरे सदमे में हैं।

नोमान और अमन — भाई बने हादसे के शिकार

22 वर्षीय नोमान, शामली जिले के झिंझाना कस्बे के रहने वाले थे। वह कॉस्मेटिक की दुकान चलाते थे और सामान खरीदने दिल्ली आए थे। उनके साथ भाई अमन भी थे।
धमाके में नोमान की मौके पर मौत हो गई, जबकि अमन गंभीर रूप से घायल हैं और आईसीयू में भर्ती हैं। परिवार ने सरकार से मुआवज़ा और दोषियों को कड़ी सज़ा की मांग की है।

लोकेश अग्रवाल और अशोक कुमार — दोस्ती में साथ, मौत में भी साथ

55 वर्षीय लोकेश अग्रवाल, अमरोहा के हसनपुर के रहने वाले थे। दिल्ली में उनका छोटा व्यापार था। घटना वाले दिन वह गंगाराम अस्पताल से लौट रहे थे और अपने दोस्त अशोक कुमार से चांदनी चौक के पास मिलने वाले थे। उसी वक्त धमाका हुआ — और दोनों की एक साथ मौत हो गई। अशोक कुमार दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) में बस कंडक्टर थे। उनकी उम्र 35 साल थी और तीन छोटे बच्चे हैं। अशोक के भाई देवेंद्र कुमार ने कहा — “वह ड्यूटी ख़त्म करके घर लौट रहे थे। हमें रात में सिर्फ़ यह सूचना मिली कि वह अब नहीं रहे।”

पंकज साहनी — 22 साल की उम्र में मौत

पंकज, बिहार के समस्तीपुर जिले से थे और पिछले 15 साल से पिता के साथ दिल्ली में रह रहे थे। वह एक कैब ड्राइवर थे। दस नवंबर को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर जाते समय वह हादसे का शिकार हो गए। परिवार ने दिल्ली में ही उनका अंतिम संस्कार किया। पंकज की अभी शादी नहीं हुई थी।

अमर कटारिया — ‘घर के लिए निकले थे, वापसी न हुई’

अमर कटारिया, दिल्ली के श्रीनिवासपुरी में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनका फार्मा का व्यवसाय लाल क़िले क्षेत्र में था। उनके पिता जगदीश कटारिया ने बताया — “वह घर के लिए निकले थे। दस मिनट पहले ही बात हुई थी। फिर पुलिस से पता चला कि उनका फोन सड़क पर मिला।” अस्पताल में परिजनों को घंटों इंतज़ार के बाद भी
स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ने उनका दर्द और बढ़ा दिया।

अस्पताल प्रशासन और राजनीति

धमाके के तुरंत बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और गृहमंत्री अमित शाह एलएनजेपी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में परिजन अपने प्रियजनों की खोज में भटकते रहे। अस्पताल प्रशासन ने सफाई दी कि “ऐसी आपात स्थिति में हमारी प्राथमिकता इलाज होती है, मुलाक़ात की नहीं।”

जांच जारी

धमाके के कारणों और जिम्मेदार लोगों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है। अब तक किसी आतंकी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि फोरेंसिक टीमें कार के अवशेषों से विस्फोटक की प्रकृति की जांच कर रही हैं।

देश शोक में

लाल क़िला धमाके ने पूरे देश को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवारों की आंखों में सिर्फ़ एक सवाल है — “हमारे अपनों की मौत का जवाब कौन देगा?”

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