बड़ा खुलासा: आतंकियों का निशाना था संसद और वीवीआईपी इलाका

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नई दिल्ली। 10 नवंबर की शाम दिल्ली के लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि आतंकी डॉक्टरों का यह मॉड्यूल नई दिल्ली के वीवीआईपी इलाके, खासतौर पर संसद परिसर, को निशाना बनाना चाहता था। पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि यह हमला संसद के शीतकालीन सत्र (1 से 19 दिसंबर) के दौरान करने की योजना थी।

डॉ. उमर था मास्टरमाइंड, ब्लास्ट से एक रात पहले गया मेवात

मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर की गतिविधियों से कई अहम सुराग मिले हैं। सीसीटीवी फुटेज में वह 9 नवंबर की रात 1:36 बजे, विस्फोटकों से भरी i20 कार में हरियाणा के मेवात टोल प्लाज़ा से गुजरता दिखा। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि वह वहां किससे मिलने गया था और किसके संपर्क में था। पकड़े गए दो आरोपियों — डॉ. मुजम्मिल अहमद और डॉ. आदिल मजीद — ने पूछताछ में बताया कि डॉ. उमर संसद भवन और कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के आसपास की रेकी कर चुका था।

38 कारों से ब्लास्ट की साजिश

एजेंसियों को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक यह मॉड्यूल देशभर में 38 कार ब्लास्ट की योजना बना रहा था। हर गाड़ी में अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर भरे जाने थे। हमलों के लिए जिन शहरों को टारगेट किया गया था, उनमें शामिल हैं — दिल्ली, अयोध्या, वाराणसी, मुंबई, हापुड़ और फरीदाबाद। अब तक हुंडई i20, लाल Ford EcoSport और ब्रेज़ा कारें बरामद की जा चुकी हैं। शक है कि मॉड्यूल के पास 10 से अधिक कारें अब भी छिपाई गई हैं।

दिल्ली में 7 जगहों पर धमाकों की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में कम से कम 7 लोकेशन पर ब्लास्ट की प्लानिंग थी — जिनमें संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, लाल क़िला, राजघाट और इंडिया गेट के आसपास के इलाके शामिल हैं। विस्फोटक सामग्री फर्टिलाइज़र दुकानों से जुटाई जा रही थी। मेवात के कई दुकानदारों से अमोनियम नाइट्रेट और केमिकल की खरीद की पुष्टि हुई है। पूरे इलाके की वीडियोग्राफी और डोर-टू-डोर जांच की जा रही है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से भी कनेक्शन

जांच अब फरीदाबाद–मेवात–हापुड़ से बढ़कर अलीगढ़ तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल के संपर्क अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के तीन छात्रों से थे। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन छात्रों की किसी आतंकी साजिश में भूमिका थी।

‘तुम भाग तो सकते हो, छिप नहीं सकते’ — थी आखिरी चेतावनी

जानकारी के अनुसार, ब्लास्ट से तीन दिन पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. उमर को चेतावनी संदेश भेजा था — “तुम भाग सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते।” 21 अक्टूबर से ही जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तारियों की लड़ी शुरू हो चुकी थी, जिससे मॉड्यूल में दहशत फैल गई थी। 9 नवंबर को डॉ. मुजम्मिल और डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद डॉ. उमर घबरा गया और विस्फोटकों से भरी कार लेकर मेवात से दिल्ली पहुंचा। रात को वह बदरपुर बॉर्डर पार कर लाल क़िले के पास पार्किंग में पहुंचा — जहां धमाका हुआ।

डायरियों से खुल सकते हैं नेटवर्क के राज

जांच एजेंसियों को डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल के ठिकानों से तीन डायरी और नोटपैड मिले हैं, जिनमें कई बातें कोडवर्ड में लिखी हुई हैं। इन नोट्स में 8 से 12 नवंबर की तारीखें दर्ज हैं — जिन्हें एजेंसियां डिकोड करने की कोशिश कर रही हैं। डायरी में हमले की ब्लूप्रिंट, केमिकल की मात्रा, गाड़ियों की लिस्ट और नेटवर्क से जुड़े कोडनेम्स लिखे होने की आशंका है।

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