लखनऊ। एक ओर जहाँ भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी देश को VVIP कल्चर से मुक्त करके सुशासन के माध्यम से विकास के पथ पर ले जाना चाहते हैं तो दूसरी ओर CBIC बोर्ड, नई दिल्ली के अधीन कस्टम्स व सेंट्रल जीएसटी विभाग के कुछ उच्च अधिकारी टैक्स कलेक्शन का काम छोड़कर, VVIP कल्चर के मजे लूटने में लिप्त हैं।

गार्ड ऑफ ऑनर, सैल्यूट, परेड, PRO और अधिकारियों के पीछे एस्कॉर्ट जैसी VVIP सुविधाएँ लेने के शौक़ीन केंद्रीय जीएसटी के इन ठसकेबाज अधिकारियों का मुद्दा अब लोकसभा तक पहुँच गया है। इसके सूत्रधार वह उच्च अधिकारी हैं, जिन्होंने विभाग में इंस्पेक्टर पद के कर्मचारियों के कार्य एवं दायित्व की न केवल अपने स्तर से व्याख्या कर डाली बल्कि कर्मचारियों को खाकी वर्दी पहनाकर गार्ड ऑफ ऑनर, परेड, एस्कॉर्ट और सैल्यूट मारने का फरमान तक जारी कर दिया।

अभी कुछ दिन पहले इस मामले में उच्च न्यायालय, लखनऊ ने तो विभाग से इसका जवाब मांगा ही था, अब जालौन के सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा ने मौजूदा लोक सभा सत्र में भी इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्रीय GST विभाग से इसका जबाब माँगा है। अब इस मामले में केंद्रीय GST विभाग की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को संसद में यह बताना होगा कि केंद्रीय GST के उच्च अधिकारियों ने किस एक्ट की किस धारा और नियम के तहत निरीक्षकों को खाकी वर्दी पहिनकर गार्ड ऑफ ऑनर, सैल्यूट, परेड, और एस्कॉर्ट जैसे कार्यों के लिए बाध्य किया। और विभाग में लोकसेवा के लिए खाकी वर्दी और उपरोक्त कार्यों की क्या आवश्यकता है।

ज्ञात हो कि करीब पिछले दो दशकों से केंद्रीय उत्पाद शुल्क (वर्तमान में केंद्रीय GST) विभाग अपने निरीक्षकों को विभागीय कार्यों जैसे छापेमारी, फर्मों का फिजिकल वेरिफिकेशन और ई-वे बिल चेकिंग आदि के लिए खाकी वर्दी पहिनने की अनुमति नहीं देता, तो क्या ये वर्दी अधिकारियों द्वारा VVIP सुविधाएँ लेने के लिए रखी गयी है।  राज्य GST विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी बिना खाकी वर्दी के ही टैक्स एकत्र करते हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय GST विभाग के निरीक्षकों को खाकी वर्दी पहिनने और उपरोक्त VVIP सेवा करने से केंद्र सरकार को कई नुकसान हैं, पहला विभाग का वह मैनपावर जिसको GST एकत्र करना चाहिए, उनको उच्च अधिकारियों की VVIP सेवा में लगा दिया जाता है, इससे सीधे सीधे राजस्व की हानि हो रही है, दूसरा इस कल्चर से विभाग में आंतरिक भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमाये हुए है, तीसरा एक मोटे अनुमान के अनुसार विभाग में प्रति वर्ष करीब 70 से 80 करोड़ रूपए इस गैर कानूनी खाकी वर्दी के रखरखाव के लिए कार्मिकों को दे दिए जाते हैं इससे सीधा सरकारी खजाने को नुकसान होता है। विभाग में व्याप्त इन सब गैर कानूनी कार्यों से जीएसटी एकत्रीकरण में कमी आ रही है और देश के विकास पर विपरीत असर पड़ रहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ऑल इंडिया कस्टम्स एंड CGST निरीक्षक संघ की लखनऊ इकाई के महासचिव अभिजात श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर केंद्रीय जीएसटी विभाग के इंस्पेक्टर रैंक के कर्मचारियों को बिना नियम, कानून के खाकी वर्दी पहिनाने, गार्ड ऑफ ऑनर, सैल्यूट, परेड, और एस्कॉर्ट देने जैसे कार्य करवाने के खिलाफ केंद्र सरकार समेत अन्य विभागीय पक्षकारों को नोटिस जारी किया है।

याची के वकील प्रिंस लेनिन का कहना है कि केंद्रीय जीएसटी विभाग के इंस्पेक्टर रैंक के कर्मचारियों के लिए मौजूदा समय में उपरोक्त गतिविधियां करवाने का कोई नियम नहीं है। इसके बावजूद विभाग के कुछ उच्च अधिकारी निरीक्षकों को ये कार्य करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे इनकार करने पर उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए गए हैं । कस्टम्स एंड CGST निरीक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल सोनी ने भी उपरोक्त घटनाक्रम की पुष्टि की है।

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