‘विवेक तिवारी हत्याकांड’ सिपाहियों को पिस्टल या रिवॉल्वर दी ही नहीं जा सकती: SIT

विवेक तिवारी हत्याकांड में एसआईटी की जांच में सामने आ रहा है कि फिल्मी अंदाज में पिस्टल निकालकर तानने के दौरान ही फायर हो गया था। दरअसल हत्यारोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को पिस्टल चलाने का प्रशिक्षण ही नहीं मिला था। अकेले प्रशांत ही नहीं राजधानी के 43 थानों में तैनात तीन सौ से ज्यादा सिपाहियों को बिना ट्रेनिंग दिए पिस्टल थमाकर ड्यूटी करवाई जा रही है। जबकि नियमानुसार सिपाहियों को पिस्टल या रिवॉल्वर दी ही नहीं जा सकती। बावजूद इसके फील्ड में प्रभाव जमाने और बड़े असलहे लेकर चलने से बचने के लिए मुंशियों को रिश्वत देकर सिपाही अवैध रूप से पिस्टल अलॉट करवा लेते हैं। सब जानने के बावजूद अधिकारी भी आंखें मूंदे रहते हैं।
पद के हिसाब से दिया जाता है असलहा
पुलिस प्रशिक्षण नियमावली में सिपाहियों से लेकर राजपत्रित अधिकारियों तक को पद के अनुसार तय असलहा चलाने और खोलने-बांधने की ट्रेनिंग देने का जिक्र है। इसके अनुसार सिपाहियों को राइफल और उसकी श्रेणी में आने वाले असलहों का प्रशिक्षण दिया जाता है। पहले केवल 303 बोर राइफल की ट्रेनिंग दी जाती थी। हालांकि करीब 15 साल पहले आधुनिक हथियार मुहैया होने के बाद इंसास, एसएलआर और कार्बाइन चलाने की ट्रेनिंग दी जाने लगी। इसमें ऊपर के रैंक में दरोगा और प्रोन्नत हेड कॉन्स्टेबल को एके-47, एनपी-5, 38 बोर के रिवॉल्वर और 9 एमएम की पिस्टल चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। छह माह की ट्रेनिंग में फायरिंग के साथ ही असलहों की पूरी जानकारी दी जाती है।

विशेष प्रशिक्षण के बाद मिलती है पिस्टल

सिपाहियों को नागरिक पुलिस से इतर व्यक्तिगत सुरक्षा में तैनात करने के लिए शैडो ट्रेनिंग दी जाती है। इसकी अवधि तीन माह होती है लेकिन विशेष परिस्थितियों में दो महीने का प्रशिक्षण देकर भी शैडो ड्यूटी में तैनाती दी जा सकती है। इस दौरान पिस्टल और रिवॉल्वर चलाने की जानकारी दी जाती है। ट्रेनिंग सेंटर के अफसरों के अनुसार शैडो ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों को सिविल ड्रेस में हथियार नजर न आने की वजह से बिना होल्स्टर के रिवॉल्वर या पिस्टल लगाने की छूट दी गई है। हालांकि फील्ड पोस्टिंग के दौरान बिना होल्स्टर के असलहा नहीं लगाया जा सकता।

राइफल टांगने से बचते हैं सिपाही

कंधे पर भारी-भरकम राइफल टांगकर चलने पर रौब नहीं रह जाता। ऐसे में पुलिसकर्मी प्रभाव जमाने के लिए कमर पर खुला छोटा असलहा लगाते हैं। इसी कारण सिपाहियों में रिवॉल्वर और पिस्टल जैसे छोटे हाथियार लेकर ड्यूटी करने की होड़ रहती है। सूत्रों की मानें तो रिजर्व पुलिस लाइंस या थाने के ड्यूटी मुंशी और असलहा इंचार्ज भी पांच सौ से एक हजार रुपये तक लेकर मनचाहा असलहा अलॉट कर देते हैं। प्रतिसार निरीक्षक आशुतोष सिंह का कहना है कि दो दिन पहले चार्ज लेने की वजह से पिस्टल या रिवॉल्वर लेकर ड्यूटी करने वाले सिपाहियों के बारे में जानकारी नहीं है। बिना शैडो ट्रेनिंग वाले सिपाहियों के पिस्टल और रिवॉल्वर जमा करवाए जाएंगे।