स्वामी चिन्मयानंद को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन’ के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान आधुनिक तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के होलोग्राम स्वरूप को देखकर प्रधानमंत्री भावुक हो गए। उन्होंने वर्ष 1993 में स्वामी जी से हुई अपनी आखिरी मुलाकात को याद किया और कहा कि ऐसा लगा मानो वे 33 साल पीछे लौट गए हों।

यह तीन दिवसीय सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चिन्मय मिशन के 75 वर्षों की आध्यात्मिक और सामाजिक यात्रा को याद करना है।

होलोग्राम देखकर ताजा हुईं पुरानी यादें

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि फरवरी या मार्च 1993 में उनकी स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती से मुलाकात हुई थी। उस समय उन्होंने स्वामी जी को अमेरिका के शिकागो में आयोजित होने वाली विश्व धर्म संसद की शताब्दी से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

स्वामी चिन्मयानंद ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया था, लेकिन 3 अगस्त 1993 को अमेरिका के सैन डिएगो में उनका निधन हो गया। कार्यक्रम के दौरान स्वामी जी के होलोग्राम स्वरूप को देखकर प्रधानमंत्री को उस मुलाकात की याद आ गई। मोदी ने इसे अपने लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव बताया।

कौन थे स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती?

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती का जन्म 8 मई 1916 को केरल के एर्नाकुलम में हुआ था। संन्यास लेने से पहले उनका नाम बालकृष्ण मेनन था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और पत्रकारिता से भी जुड़े रहे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी उन्होंने भागीदारी की।

बाद में उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और ऋषिकेश में स्वामी शिवानंद सरस्वती से दीक्षा ली। इसके बाद स्वामी तपोवन महाराज के मार्गदर्शन में वेदांत का अध्ययन किया।

1951 में हुई चिन्मय मिशन की शुरुआत

स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की। इसका उद्देश्य वेदांत, उपनिषदों और भगवद्गीता के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाना था।

समय के साथ चिन्मय मिशन ने भारत सहित कई देशों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। संस्था आध्यात्मिक शिक्षा, गीता अध्ययन, युवाओं के प्रशिक्षण और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम संचालित करती है।

युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर दिया जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र, संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रसार के लिए समर्पित था।

उन्होंने युवाओं से व्यक्तिगत विकास को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, युवाओं की ऊर्जा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार देश के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

75 वर्षों की यात्रा का उत्सव

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। यह कार्यक्रम चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित वर्षभर के समारोहों का समापन है।

सम्मेलन के जरिए स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और समाज में मिशन के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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