अरुणाचल सीमा पर भारत-चीन सैनिक फिर आमने-सामने: ITBP
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। ITBP प्रमुख के बयान के अनुसार, राज्य के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देश सीमा विवाद सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी कर रहे हैं।
जुलाई से जारी है सीमा पर तनाव
रिपोर्टों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तवांग नहीं, बल्कि तक्सिंग और असफिला क्षेत्र के आसपास सीमा पर तनाव की स्थिति सामने आई है। जुलाई 2026 में भारतीय और चीनी गश्ती दलों के आमने-सामने आने की खबरें आई थीं।
ITBP महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ है। हालांकि, आमने-सामने की स्थिति का अर्थ हर मामले में गोलीबारी या सशस्त्र संघर्ष होना नहीं है।
चीन की गतिविधियों पर भारत की नजर
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि असफिला के आसपास कुछ स्थानों पर चीनी सैनिकों ने तंबू लगाए थे। भारतीय पक्ष की सीमा संबंधी समझ के अनुसार, ये स्थान वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब हैं।
भारत और चीन के बीच LAC का पूर्ण सीमांकन नहीं हुआ है। इसी कारण कुछ इलाकों में दोनों देशों की सीमा संबंधी धारणाएं अलग-अलग हैं और गश्ती दलों के आमने-सामने आने की घटनाएं होती रही हैं।
ITBP ने बढ़ाई युद्धक तैयारी
सीमा पर बदलती परिस्थितियों को देखते हुए ITBP अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रही है। महानिदेशक ने बल की तैयारियों के बारे में बताते हुए कई कदमों का उल्लेख किया।
- शौर्य कमांडो: विशेष रूप से प्रशिक्षित लड़ाकू टीमों को तैयार किया गया है।
- ड्रोन प्लाटून: सीमावर्ती इकाइयों में ड्रोन आधारित निगरानी और संचालन क्षमता बढ़ाई जा रही है।
- ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण: गलवान जैसी कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
- भूमिगत ढांचा: सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा और संचालन क्षमता मजबूत करने के लिए भूमिगत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
ITBP का गठन 1962 में हुआ था। यह बल भारत-चीन सीमा के लगभग 3,488 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है।
सैन्य बातचीत के बावजूद क्यों अहम है मामला?
भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर सैन्य कमांडर स्तर और कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत होती रही है। सितंबर में पूर्वी क्षेत्र में कमांडर स्तर की बैठक भी हुई थी। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में आमने-सामने की स्थिति बने रहने की खबरें सामने आई हैं।
भारत का लगातार यह रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा पर किसी भी घटना को मौजूदा संवाद तंत्र के माध्यम से सुलझाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सीमा पर जारी तनाव को बातचीत और स्थापित सैन्य प्रक्रियाओं के जरिए किस तरह कम किया जाता है। ITBP की ओर से ड्रोन, विशेष कमांडो और आधुनिक प्रशिक्षण पर जोर यह दिखाता है कि बल कठिन सीमावर्ती परिस्थितियों से निपटने की तैयारी कर रहा है।
