96% मुस्लिम आबादी वाला देश, फिर स्कूलों में हिजाब पर विवाद क्यों?
नई दिल्ली। दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां धर्म और सरकार के बीच संबंधों को लेकर बहस होती रहती है। अब दक्षिण काकेशस के मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देश की करीब 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, लेकिन अजरबैजान का संविधान उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है। सरकार ने सरकारी स्कूलों में यूनिफॉर्म से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। आदेश में हिजाब का नाम सीधे नहीं लिया गया, लेकिन कई स्कूलों में हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं और महिला शिक्षकों को रोके जाने की खबरें सामने आई हैं।
स्कूलों में हिजाब को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?
अजरबैजान की कैबिनेट ने 21 सितंबर 2026 को सरकारी सामान्य शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म से जुड़े नियमों में संशोधन किया। सरकार का कहना है कि ड्रेस कोड का उद्देश्य स्कूलों में एक समान व्यवस्था बनाए रखना और शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को कायम रखना है।
नए नियमों में ऐसे कपड़ों पर रोक लगाई गई है जिन्हें निर्धारित यूनिफॉर्म के अनुरूप नहीं माना जाता या जो अधिकारियों की नजर में धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के सिद्धांत से मेल नहीं खाते। नियमों में हिजाब का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन कुछ स्कूलों ने इन्हें हिजाब पहनने वाली छात्राओं के खिलाफ लागू किया है।
छात्राओं को स्कूल के गेट से लौटाने की खबरें
नियम लागू होने के बाद कुछ स्कूलों में हिजाब पहनकर पहुंचीं छात्राओं को प्रवेश नहीं दिए जाने की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी प्रसारित हुए जिनमें छात्राएं अपनी शिक्षिकाओं को गले लगाकर रोती दिखाई दीं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम दो स्कूलों में विद्यार्थियों ने विरोध में कक्षाओं का बहिष्कार किया। कुछ छात्राओं और उनके समर्थकों का कहना है कि धार्मिक आस्था के कारण उन्हें शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
37 लोगों को हिरासत में लिया गया
अजरबैजान के गृह मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को बताया कि ड्रेस कोड के नियमों को लागू करने के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने के आरोप में 37 लोगों को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ घटनाओं में स्कूलों के कामकाज और सामान्य गतिविधियों में बाधा पहुंची थी।
हालांकि, इस मामले में प्रदर्शनकारियों और नियमों का समर्थन करने वालों के विचार अलग-अलग हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा सवाल मान रहे हैं, जबकि अन्य सरकारी स्कूलों में समान ड्रेस कोड और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के पक्ष में हैं।
मुस्लिम आबादी के बावजूद अजरबैजान धर्मनिरपेक्ष देश
अजरबैजान की लगभग 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम मानी जाती है। इसके बावजूद देश का संवैधानिक ढांचा धर्म और राज्य को अलग रखने के सिद्धांत पर आधारित है।
- अनुच्छेद 7: अजरबैजान को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बताता है।
- अनुच्छेद 18: धर्म और राज्य को अलग रखने तथा सरकारी शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष चरित्र का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 48: अंतरात्मा और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।
इन्हीं संवैधानिक सिद्धांतों के बीच अब यह बहस चल रही है कि सरकारी स्कूलों में समान यूनिफॉर्म लागू करने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
शिक्षकों के लिए भी ड्रेस कोड बना विवाद की वजह
मामला सिर्फ छात्राओं तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, हिजाब पहनने वाली कुछ महिला शिक्षकों को भी स्कूल में प्रवेश करने से रोका गया। शिक्षिका ज़हरा हसनोवा ने अल जज़ीरा से बातचीत में कहा कि हिजाब पहनना उनकी व्यक्तिगत पसंद है और इस मामले ने उन्हें भावनात्मक रूप से आहत किया है।
कुछ शिक्षकों का तर्क है कि उन्हें धार्मिक विश्वास के कारण नौकरी करने से नहीं रोका जाना चाहिए। वहीं, नियमों का समर्थन करने वाले लोग कहते हैं कि सरकारी स्कूलों में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन जरूरी है।
तुर्की तक पहुंचा विवाद
अजरबैजान और तुर्की के बीच करीबी सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध हैं। दोनों देश अपने रिश्तों को अक्सर ‘एक राष्ट्र, दो राज्य’ के रूप में बयान करते हैं। स्कूलों में हिजाब से जुड़े विवाद पर तुर्की में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्तांबुल में अजरबैजान के वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए। तुर्की के कुछ नेताओं और अधिकारियों ने भी नए नियमों की आलोचना की है। इससे यह मुद्दा केवल शिक्षा और ड्रेस कोड तक सीमित न रहकर धार्मिक स्वतंत्रता और दोनों देशों के संबंधों से भी जुड़ गया है।
क्या अजरबैजान में हर जगह हिजाब पर प्रतिबंध है?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विवाद सरकारी स्कूलों में ड्रेस कोड लागू करने को लेकर है। सरकार के आदेश में हिजाब पर सीधे प्रतिबंध का उल्लेख नहीं है, लेकिन कुछ स्कूलों ने नियमों की व्याख्या इस तरह की है कि हिजाब पहनने वाली छात्राओं और शिक्षकों को प्रवेश नहीं मिल रहा।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अजरबैजान में आम नागरिकों के लिए हर जगह हिजाब पहनना प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिलहाल विवाद सरकारी शिक्षा संस्थानों में नियमों के इस्तेमाल और धार्मिक स्वतंत्रता पर उनके प्रभाव को लेकर है।
अजरबैजान में स्कूल यूनिफॉर्म के नए नियमों ने धर्मनिरपेक्ष शिक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच बहस तेज कर दी है। एक ओर सरकार समान ड्रेस कोड की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्राएं और शिक्षक धार्मिक आस्था के कारण शिक्षा और रोजगार से वंचित न किए जाने की मांग उठा रहे हैं।
