इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता पर संकट, गादी आइज़ेनकोट को विपक्ष का समर्थन
तेल अवीव। इजरायल में हालिया चुनाव के बाद नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद विपक्षी दलों ने गादी आइज़ेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हालांकि, विपक्ष के पास बहुमत तक पहुंचने का रास्ता होने के बावजूद गठबंधन की राह आसान नहीं है।
आइज़ेनकोट के समर्थन में आए विपक्षी दल
इजरायल के प्रमुख विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के सामने गादी आइज़ेनकोट का नाम सरकार बनाने के लिए प्रस्तावित करने का फैसला किया है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाले दल, अविग्दोर लिबरमैन की पार्टी और यायर गोलान के नेतृत्व वाले डेमोक्रेट्स ने आइज़ेनकोट के समर्थन का ऐलान किया है।
अरब दलों के समर्थन से आइज़ेनकोट के पक्ष में सांसदों की सिफारिशों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे उन्हें सरकार बनाने का पहला अवसर मिलने की स्थिति मजबूत हो सकती है।
120 सदस्यीय संसद में बहुमत का गणित
इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सदस्य हैं। सरकार बनाने और संसद में बहुमत साबित करने के लिए 61 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है।
चुनाव के बाद उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले यहूदी विपक्षी दलों के पास 48 सीटें हैं। अरब दलों के पास कुल 19 सीटें हैं। यदि विपक्षी दल और अरब पार्टियां एक साथ आती हैं, तो उनके पास संभावित रूप से 67 सीटों का समर्थन हो सकता है।
हालांकि, केवल समर्थन की घोषणा से सरकार बनना तय नहीं है। अलग-अलग दलों के बीच नीतिगत मतभेद और गठबंधन की शर्तें इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं।
अरब दलों के समर्थन पर फंसा पेंच
आइज़ेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के बीच सहमति बनाना है। कुछ विपक्षी नेता अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने के पक्ष में हैं, जबकि अविग्दोर लिबरमैन ने अरब दलों के बाहरी समर्थन पर निर्भर अल्पमत सरकार का विरोध किया है।
इस मतभेद के कारण विपक्षी गठबंधन के लिए बहुमत जुटाना आसान नहीं होगा। यदि सभी दल एक साझा रणनीति पर सहमत नहीं होते, तो नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की कोशिश कमजोर पड़ सकती है।
नेतन्याहू भी सरकार बनाने की कोशिश में
दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू ने व्यापक गठबंधन सरकार बनाने की संभावना पर जोर दिया है। उनके सामने चुनौती अपने सहयोगी दलों को एकजुट रखने और अन्य सांसदों का समर्थन जुटाने की है।
राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग 4 नवंबर से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श शुरू करने वाले हैं। इसके बाद वह तय करेंगे कि किस सांसद को नई सरकार बनाने का अवसर दिया जाए। सबसे अधिक समर्थन की सिफारिशें हासिल करना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन इससे सरकार बनना अपने आप सुनिश्चित नहीं होता।
क्या इजरायल में फिर होंगे चुनाव?
यदि कोई भी नेता निर्धारित प्रक्रिया के भीतर सरकार बनाने और संसद का विश्वास हासिल करने में विफल रहता है, तो इजरायल में दोबारा चुनाव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और समर्थन जुटाने की कोशिशें जारी हैं।
इजरायल में चुनाव के बाद सत्ता का समीकरण अनिश्चित बना हुआ है। गादी आइज़ेनकोट को विपक्षी दलों का समर्थन मिलने से नेतन्याहू के सामने चुनौती बढ़ी है, लेकिन अरब दलों के समर्थन और गठबंधन की शर्तों पर सहमति के बिना नई सरकार का रास्ता साफ नहीं होगा।
