वाखान कॉरिडोर: चीन की सीमा तक पहुंची अफगानिस्तान की सड़क
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026। अफगानिस्तान ने चीन की सीमा तक पहुंचने वाले वाखान कॉरिडोर में करीब 121 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया है। बदख्शां प्रांत के वाखान इलाके से चीन के शिनजियांग क्षेत्र की ओर जाने वाली यह सड़क फिलहाल आधुनिक हाईवे के बजाय कच्चे/ग्रेवल मार्ग के रूप में विकसित की गई है। इसके बावजूद इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अफगानिस्तान और चीन के बीच सीधा जमीनी रास्ता
वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान की उत्तर-पूर्वी सीमा में मौजूद एक संकरी पट्टी है, जो चीन के शिनजियांग तक पहुंचती है। नई सड़क ब्रोघिल क्षेत्र से चीन की सीमा तक बनाई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक इसका निर्माण दो चरणों में हुआ और इसकी लागत करीब 365 मिलियन अफगानी, यानी लगभग 5.5 मिलियन डॉलर बताई गई है।
अफगानिस्तान के लिए यह परियोजना व्यापार और प्राकृतिक संसाधनों को चीन तक पहुंचाने के नए विकल्प के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि, फिलहाल इसे पूरी तरह विकसित अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सीमा पर कस्टम, लॉजिस्टिक्स और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होगी।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है वाखान?
वाखान कॉरिडोर की लोकेशन इसे भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बनाती है। यह इलाका चीन के शिनजियांग, पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान और भारत के लद्दाख से जुड़े व्यापक रणनीतिक क्षेत्र के आसपास स्थित है।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि नई सड़क सीधे लद्दाख तक पहुंचती है। इसका महत्व मुख्य रूप से इस बात में है कि अफगानिस्तान-चीन संपर्क अब इस संवेदनशील क्षेत्र में और मजबूत हो सकता है।
चीन के लिए भी रणनीतिक महत्व
चीन के लिए वाखान कॉरिडोर केवल व्यापार का रास्ता नहीं है। शिनजियांग की सुरक्षा और अफगानिस्तान से संभावित सुरक्षा चुनौतियों के कारण बीजिंग इस क्षेत्र पर लंबे समय से नजर रखता रहा है। सड़क के विकास से चीन-अफगानिस्तान के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
CPEC के बीच नया विकल्प?
इस घटनाक्रम की तुलना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC से भी की जा रही है। वाखान मार्ग चीन को अफगानिस्तान के रास्ते एक अलग भौगोलिक विकल्प दे सकता है। हालांकि, अभी यह सड़क CPEC के स्तर की विकसित परिवहन व्यवस्था नहीं है, इसलिए इसके तत्काल आर्थिक प्रभाव को लेकर सावधानी जरूरी है।
सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
वाखान क्षेत्र बेहद दुर्गम और संवेदनशील है। अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति, सीमा-पार गतिविधियां और बुनियादी ढांचे की कमी इस मार्ग के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती हैं। इसलिए सड़क का उद्घाटन अपने आप में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारे के शुरू होने की गारंटी नहीं है।
वाखान कॉरिडोर में 121 किलोमीटर की सड़क अफगानिस्तान और चीन के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। भारत के लिए इसका महत्व मुख्यतः इसकी लद्दाख, शिनजियांग और पाकिस्तान-अधिकृत क्षेत्रों के आसपास की रणनीतिक स्थिति के कारण है। आने वाले समय में चीन-अफगानिस्तान इस मार्ग को किस स्तर तक विकसित करते हैं, इसी से इसका वास्तविक रणनीतिक प्रभाव स्पष्ट होगा।
