Sanchar Nest: क्या अपर आवास आयुक्त दीपक सिंह समिति के सचिव पी कुमार को संरक्षण दे रहे ?
गाजियाबाद। Sanchar Nest Sahakari Awas Samiti को लेकर चल रहे विवाद में अब अपर आवास आयुक्त दीपक सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि समिति के सचिव पी. कुमार और मौजूदा प्रबंधन समिति के खिलाफ गंभीर शिकायतें और जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
उपलब्ध दस्तावेजों में समिति के कामकाज, निर्माण, Escalation Charges, सदस्यों से वसूली और प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं। दस्तावेज में यह भी आरोप है कि समिति के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों के बीच हितों का टकराव जांच का विषय होना चाहिए।
Sanchar Nest मामले में जारी विभागीय आदेशों के बावजूद शिकायतकर्ताओं ने अपर आवास आयुक्त/अपर निबंधक दीपक सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विभागीय आदेशों में समिति के खिलाफ सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख होने के बावजूद पिछले करीब 10 महीनों में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उपलब्ध आदेशों में समिति के रिकॉर्ड, वित्तीय गतिविधियों, सदस्यों की शिकायतों और प्रबंधन के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल दर्ज हैं। इसके बावजूद पूरी Managing Committee को हटाने या समिति के प्रबंधन में निर्णायक कार्रवाई करने के बजाय मामला लंबित रखा गया।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि दीपक सिंह समिति के सचिव पी कुमार और Managing Committee को कथित तौर पर संरक्षण दे रहे हैं। हालांकि यह आरोप शिकायतकर्ताओं का है और संबंधित अधिकारी का पक्ष इस संबंध में उपलब्ध नहीं है।
विभागीय दस्तावेजों में समिति के पिछले 15 वर्षों के आय-व्यय और बैंक खातों का Special Audit कराने के निर्देश का भी उल्लेख है। साथ ही समिति के अभिलेखों के अधिग्रहण और जांच में सहयोग सुनिश्चित कराने के लिए कार्रवाई की गई है।
सवाल कार्रवाई पर है
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब विभागीय स्तर पर समिति के रिकॉर्ड और दस्तावेजों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया तक शुरू की जा चुकी है, तो फिर जिम्मेदार पदाधिकारियों पर निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
दस्तावेजों में समिति के रिकॉर्ड, खातों और कामकाज की जांच की जरूरत बताई गई है। साथ ही 12 जून 2026 के आदेश सहित आगे की विभागीय कार्रवाई का भी उल्लेख मिलता है।
पी. कुमार पर भी गंभीर आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व/समिति सचिव पी. कुमार के कार्यकाल और निर्णयों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। आरोपों में समिति की संपत्तियों, फ्लैटों और दुकानों के आवंटन/रजिस्ट्रेशन से लेकर प्रबंधन के फैसलों में संभावित हितों के टकराव तक के मुद्दे शामिल हैं।
कानूनी मामलों में भी समिति को झटका
दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने 8 जून 2026 को Sanchar Nest के खिलाफ एक मामले में दो होमबायर्स को कुल ₹79.43 लाख की मूल राशि, ब्याज तथा मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे के खर्च के लिए अतिरिक्त राशि देने का आदेश दिया था। आयोग ने परियोजना में 15 साल से अधिक की देरी को गंभीरता से लिया।
वहीं, 5 अगस्त 2026 को ITAT ने Sanchar Nest से जुड़े आयकर मामलों में धारा 153C के तहत कार्यवाही को अधिकार-क्षेत्र के आधार पर रद्द किया। यह आदेश खरीदारों की रजिस्ट्री, कब्जे या समिति के कथित वित्तीय अनियमितताओं पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं देता।
विधान परिषद की समन्वय समिति के सामने लंबित मामला
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, Sanchar Nest से जुड़ा मामला उत्तर प्रदेश विधान परिषद की समन्वय समिति (Samanvay Samiti) के समक्ष भी विचाराधीन है। उनका कहना है कि जब मामला विधान परिषद की समिति के सामने लंबित है, तब विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई और अब तक की प्रगति महत्वपूर्ण हो जाती है।
दस्तावेज में भी इस प्रकरण के विधान परिषद की संबंधित समिति के विचाराधीन होने का उल्लेख किया गया है।
“आदेश खुद बता रहे हैं कि मामला कितना गंभीर है”
पीड़ित पक्ष का कहना है कि विभागीय आदेशों में दर्ज तथ्यों के बाद अब केवल जांच के नाम पर मामला लंबा खींचने के बजाय जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। उनका आरोप है कि यदि समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में भी सहयोग नहीं किया गया, तो प्रबंधन को तत्काल हटाकर स्वतंत्र व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
अब सवाल यही है कि जब विभागीय दस्तावेज खुद समिति के कामकाज और वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच की जरूरत बता रहे हैं, तो जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कब होगी?
सबसे बड़ा सवाल
ऐसे में सवाल सिर्फ Sanchar Nest के प्रबंधन से नहीं, बल्कि निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारियों से भी है—जब समिति के खिलाफ लगातार शिकायतें, जांच और कार्रवाई के आदेश सामने आ रहे हैं, तो आखिर पी. कुमार और प्रबंधन समिति के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या अपर आवास आयुक्त दीपक सिंह वास्तव में प्रबंधन को संरक्षण दे रहे हैं, जैसा कि शिकायतकर्ताओं का आरोप है, या इसके पीछे कोई प्रशासनिक/कानूनी वजह है?
