सामाजिक असमानता खत्म होने तक जारी रहे आरक्षण: मोहन भागवत

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मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में सामाजिक भेदभाव और असमानता बनी हुई है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच के अनुरूप समझने की आवश्यकता है।

मुंबई में इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के कार्यक्रम में Gen Z और Gen Alpha के युवाओं के साथ संवाद के दौरान भागवत ने कहा कि आरक्षण सामाजिक कारणों से दिया गया था और इसका उद्देश्य सामाजिक समानता स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय सामाजिक न्याय के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और वे सामाजिक व आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें स्वेच्छा से दूसरों के लिए अवसर छोड़ने पर विचार करना चाहिए, ताकि जरूरतमंद और वंचित लोगों तक भी इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उप-वर्गीकरण (Sub-categorisation) संबंधी टिप्पणियों का भी उल्लेख किया।

युवाओं को लेकर भागवत ने कहा कि Gen Z और Gen Alpha पहले की पीढ़ियों से अलग हैं। वे तर्क, संवाद और पारदर्शिता चाहते हैं। उन्होंने छात्र आंदोलनों को लोकतंत्र का हिस्सा बताते हुए कहा कि विरोध करने वाले युवाओं को “राष्ट्रविरोधी” नहीं कहा जाना चाहिए। यदि उनकी शिकायतें वास्तविक हैं, तो सरकार और समाज को उन्हें सुनना और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर भी उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि केवल छोटे-छोटे बदलाव पर्याप्त नहीं हैं। शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम माना जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने, शिक्षकों के प्रशिक्षण को मजबूत करने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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