पाकिस्तान में जैश के आतंकियों का खुल्लम-खुल्ला रोड शो
इस्लामाबाद/नई दिल्ली | आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले पाकिस्तान का दोहरा चेहरा एक बार फिर वैश्विक मंच पर बेनकाब हो गया है। शहबाज शरीफ सरकार की नाक के नीचे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांत में न केवल रैलियां निकालीं, बल्कि भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला।
पुलिस की पहरेदारी में आतंकी मार्च
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा के चारसड्डा और स्वाबी जिलों में जैश के 150 से अधिक प्रशिक्षित आतंकियों और कमांडरों ने सैकड़ों मोटरसाइकिलों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन आतंकियों को रोकने के बजाय, पाकिस्तान की पुलिस उन्हें सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देती नजर आई। वीडियो में जैश के झंडे लहराते हुए और भारत विरोधी नारेबाजी करते हुए आतंकी खुलेआम सड़कों पर घूमते दिखे।
मसूद अजहर का नया ठिकाना बना नवाबशाह?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिंध प्रांत का नवाबशाह अब जैश-ए-मोहम्मद का नया गढ़ बन चुका है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन का सरगना मसूद अजहर पिछले तीन महीनों से नवाबशाह की ‘गुलाम रसूल कॉलोनी’ में स्थित एक मदरसे में छिपा हुआ है। भारत की कार्रवाई के डर से आतंकियों ने अपने ट्रेनिंग कैंप और ठिकाने कश्मीर सीमा से हटाकर इन अंदरूनी इलाकों में शिफ्ट कर दिए हैं।
मासूमों के हाथों में थमाई बंदूकें
रैली की वायरल तस्वीरों में छोटे बच्चों के हाथों में भी नकली बंदूकें और जैश के झंडे दिखाई दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ (5 फरवरी) के नाम पर पाकिस्तान एक बार फिर नई पीढ़ी के दिमाग में नफरत भरने और आतंकियों को मुख्यधारा में संरक्षण देने का काम कर रहा है।
सत्ता और सेना की मिलीभगत
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब पाकिस्तान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और दुनिया से मदद की गुहार लगा रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आतंकवाद के खात्मे की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी (PTI) की सरकार और वहां की पुलिस इन आतंकियों को प्रोटोकॉल दे रही है। इससे साफ है कि पाकिस्तान की राजनीति, सेना और आईएसआई अभी भी भारत विरोधी आतंकी समूहों को पालने की अपनी पुरानी नीति पर कायम हैं।
