दावोस में ट्रंप का ‘हृदय परिवर्तन’: पीएम मोदी की तारीफों के पुल बांधे
नई दिल्ली/दावोस: स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) से एक ऐसी खबर आई है जिसने वैश्विक राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। कभी भारत पर भारी टैरिफ लगाने और सख्त रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के कसीदे पढ़ रहे हैं। ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना “शानदार दोस्त” बताते हुए भारत के साथ एक बड़ी ट्रेड डील होने की उम्मीद जताई है।
विशेषज्ञ इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और बढ़ती आर्थिक शक्ति की बड़ी जीत मान रहे हैं।
ट्रंप के सुर बदले: ‘दुश्मनी’ से ‘दोस्ती’ तक का सफर
पिछले एक साल में ट्रंप प्रशासन ने भारत के प्रति काफी कड़ा रुख अपनाया था। रूस से तेल खरीदने के फैसले पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50% तक का टैरिफ ठोक दिया था। यहाँ तक कि एक समय उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ तक कह दिया था। लेकिन दावोस में उनके बदले हुए तेवर पूरी तरह अलग थे:
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ट्रंप का बयान: “प्रधानमंत्री मोदी के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। वे एक शानदार व्यक्ति और मेरे अच्छे दोस्त हैं। हम जल्द ही एक बेहतरीन (ट्रेड) डील करने जा रहे हैं।”
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संकेत: यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि उस दबाव का नतीजा है जो भारत ने अपनी कूटनीति से अमेरिका पर बनाया है।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: भारत-यूरोपीय संघ की महासंधि
ट्रंप के इस हृदय परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ा कारण भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा मानी जा रही है। अगले हफ्ते होने वाली इस घोषणा को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।
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विशाल बाजार: इस संधि के दायरे में दुनिया की 25% जीडीपी और करीब 2 अरब की आबादी आएगी।
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अमेरिका की चिंता: अमेरिका को डर है कि अगर यूरोपीय संघ ने भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली, तो अमेरिकी कंपनियां पीछे छूट सकती हैं।
“भारत बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था”
दावोस में केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि आर्थिक भविष्यवाणियां भी भारत के पक्ष में रहीं। अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी दिग्गज कार्लाइल ग्रुप के को-फाउंडर डेविड रूबेनस्टीन ने भविष्यवाणी की है कि:
“अगले 20 से 30 सालों के भीतर भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।”
वर्तमान में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जिस तेजी से यह जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ने की ओर बढ़ रहा है, उसने पश्चिमी देशों को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर कर दिया है।
रक्षा और खाड़ी देशों में भारत की बढ़ती धमक
भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक सुरक्षा प्रदाता (Security Provider) के रूप में भी उभर रहा है:
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UAE के साथ रणनीतिक साझेदारी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 2032 तक अपने व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: भारत अब रक्षा सौदे अपनी शर्तों पर कर रहा है। यूएई और यूरोपीय संघ के साथ नई ‘सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप’ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
झुकना पड़ा महाशक्ति को
यह स्पष्ट है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव (चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो या टैरिफ की धमकी) के आगे घुटने नहीं टेके। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का नारा देने वाले ट्रंप को अब समझ आ गया है कि भारत को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। भारत अपनी कूटनीति के जरिए दुनिया की महाशक्तियों को अपनी शर्तों पर मेज पर लाने में सफल रहा है।
