सनातन की आस्था और संस्कृति को मिटाना असंभव, सोमनाथ मंदिर इसका जीवंत उदाहरण: अमित शाह
गांधीनगर | केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गांधीनगर के मानसा में ₹267 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और जनमानस की आस्था को मिटाना आसान नहीं है। उन्होंने सदियों से सोमनाथ मंदिर पर हुए हमलों और उसके बार-बार पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए इसे भारतीय गौरव का प्रतीक बताया।
‘विध्वंसक गायब हुए, निर्माता आज भी शान से खड़े हैं’
सोमनाथ मंदिर के इतिहास पर चर्चा करते हुए शाह ने कहा, “महमूद गजनी, अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे आक्रमणकारियों ने सोमनाथ मंदिर को 16 बार नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन वे अंततः इतिहास से गायब हो गए। मंदिर आज भी उसी स्थान पर शान से खड़ा है।” उन्होंने घोषणा की कि देशभर में इस साल ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वहाँ बन रहा भव्य ‘सोमनाथ कॉरिडोर’ पूरी दुनिया को भारत की अटूट आस्था का संदेश देगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा में मील का पत्थर: गांधीनगर में बीएसएल-4 लैब
अमित शाह ने गांधीनगर में ₹362 करोड़ की लागत से बनने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की ‘बायो सेफ्टी लैब-4’ (BSL-4) और ‘एनिमल बायो सेफ्टी लेवल लैब’ का शिलान्यास किया।
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महत्व: पुणे के बाद यह देश की प्रमुख लैब होगी जो जानलेवा वायरस की पहचान करने और पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases) की रोकथाम में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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युवाओं के लिए अवसर: यह लैब शोधकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक उपलब्ध कराएगी।
स्टार्टअप और इनोवेशन: 2014 बनाम 2026
देश के आर्थिक और तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए, जो बदलते भारत की तस्वीर दिखाते हैं:
| विवरण | वर्ष 2014 | वर्ष 2026 (वर्तमान) |
| स्टार्टअप्स की संख्या | 500 से कम | 10,000 से अधिक |
| इनक्युबेटर्स की संख्या | 06 | 95 |
| निजी निवेश | ₹10 करोड़ | ₹7,000 करोड़ |
| पेटेंट फाइलिंग (वार्षिक) | 125 | 1,300 से अधिक |
अमित शाह ने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत का युवा अब केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहा है।
आजादी के महानायकों को किया याद
शाह ने आजादी के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ पर हमला केवल एक इमारत पर नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और आत्मसम्मान पर हमला था, जिसे इन महानायकों ने पुनः प्रतिष्ठित किया।
