BMC चुनाव: महामुकाबला कल, ठाकरे भाइयों के मिलन और पवारों की ‘करीबी’ ने बदले समीकरण

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मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति के लिए कल यानी 15 जनवरी का दिन बेहद निर्णायक होने जा रहा है। राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए होने वाले मतदान से ठीक पहले जो नए राजनीतिक गठजोड़ उभरे हैं, उन्होंने न केवल राज्य बल्कि केंद्र की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है। इन चुनावों को 2026 की राजनीति की दिशा तय करने वाला ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा है।

बीएमसी: ठाकरे परिवार की साख दांव पर

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) पर पिछले 25 वर्षों से काबिज ठाकरे परिवार के लिए यह चुनाव ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बन गया है। करीब 75 हजार करोड़ रुपये के सालाना बजट वाली बीएमसी को अपने हाथ से फिसलता देख उद्धव ठाकरे ने पुरानी कड़वाहटों को दरकिनार कर भाई राज ठाकरे से हाथ मिलाया है। हालांकि, सत्तारूढ़ महायुति (बीजेपी और शिंदे सेना) इस गढ़ को ढहाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है।

बिखरती विपक्षी एकता: राज ठाकरे बने कांग्रेस की ‘एलर्जी’

निकाय चुनावों से पहले ही I.N.D.I.A. ब्लॉक और महाविकास आघाड़ी (MVA) की गांठें खुलती नजर आ रही हैं।

  • कांग्रेस की दूरी: राज ठाकरे की एंट्री के बाद कांग्रेस ने उद्धव सेना से दूरी बना ली है। कांग्रेस का मानना है कि राज ठाकरे की ‘उत्तर भारतीय विरोधी’ छवि के कारण उन्हें साथ लेने से हिंदी भाषी राज्यों में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।

  • सपा का रुख: समाजवादी पार्टी भी इस गठबंधन से बाहर हो चुकी है, जिससे विपक्षी खेमा पूरी तरह बिखरा हुआ है।

पवार परिवार में ‘बर्फ’ पिघली: विलय के संकेत

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू शरद पवार और अजित पवार के बीच बढ़ती नजदीकी है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड में दोनों गुट मिलकर बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा: अनुमान है कि चुनाव नतीजों के बाद शरद पवार और अजित पवार के गुटों का विलय हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो सुप्रिया सुले और शरद पवार की एनसीपी सीधे सत्ता के समीकरणों का हिस्सा बन सकती है।

प्रमुख गठबंधन: एक नजर में

गठबंधन मुख्य दल वर्तमान स्थिति
महायुति (NDA) बीजेपी, शिंदे सेना, अजित एनसीपी कई सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’, लेकिन गठबंधन एकजुट।
ठाकरे गठबंधन उद्धव सेना + मनसे (राज ठाकरे) बीएमसी बचाने के लिए परिवार एक हुआ, लेकिन कांग्रेस नाराज।
महाविकास आघाड़ी कांग्रेस, एनसीपी-एसपी (बिखराव की ओर) वैचारिक मतभेदों के कारण गठबंधन में बड़ी दरार।

चुनाव का महत्व और प्रभाव

  1. केंद्र की दिशा: इन नतीजों का असर विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A.’ की राष्ट्रीय रणनीति पर पड़ेगा।

  2. वर्चस्व की जंग: यह तय होगा कि असली शिवसेना और असली एनसीपी किसके पास है।

  3. मुंबई का भविष्य: बीएमसी के नतीजे तय करेंगे कि मुंबई की तिजोरी पर किसका नियंत्रण होगा।

कल सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होगा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

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