ईरान में हिंसा का तांडव: अधिकारियों ने पहली बार स्वीकारी 2000 मौतों की बात
तेहरान: ईरान में पिछले कुछ समय से जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने अब तक का सबसे भयावह रूप ले लिया है। ईरानी अधिकारियों ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि इन प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों में अब तक सुरक्षाकर्मियों सहित लगभग 2,000 लोग मारे जा चुके हैं। यह पहली बार है जब प्रशासन ने इतनी बड़ी संख्या में हताहतों का आंकड़ा सार्वजनिक किया है।
‘आतंकवादियों’ पर लगाया आरोप
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि इन मौतों के पीछे वे ‘आतंकवादी’ तत्व शामिल हैं, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों दोनों को अपना निशाना बनाया है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक मारे गए लोगों की विस्तृत पहचान या मृतकों के अलग-अलग आंकड़ों (प्रदर्शनकारी बनाम सुरक्षाकर्मी) की जानकारी साझा नहीं की है।
तीन साल की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती
खराब आर्थिक हालातों और महंगाई के कारण शुरू हुई यह अशांति पिछले तीन वर्षों में ईरानी शासन के लिए सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल इजरायल और अमेरिका की ओर से हुए सैन्य दबाव के बाद ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर तनाव झेल रहा था, ऐसे में घरेलू विद्रोह ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
प्रशासन का ‘दोहरा रुख’
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता संभाल रहे ईरान के धार्मिक नेतृत्व ने इस संकट पर दोहरा रुख अपनाया है। एक ओर सरकार ने स्वीकार किया है कि खराब आर्थिक स्थिति को लेकर जनता का गुस्सा ‘जायज’ है, लेकिन दूसरी ओर सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जा रही है।
विदेशी साजिश का दावा
ईरानी अधिकारियों ने इस अशांति का दोष सीधे तौर पर अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी अमेरिका और इजरायल पर मढ़ा है। उनका दावा है कि विदेशी ताकतों और उनके द्वारा समर्थित ‘आतंकवादियों’ ने आम जनता के विरोध प्रदर्शनों को हाईजैक कर लिया है ताकि देश में अस्थिरता पैदा की जा सके।
मानवाधिकार समूहों की चिंता और इंटरनेट पर पाबंदी
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों से भी अधिक हो सकती है और अब तक हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि ईरान में पिछले कई दिनों से इंटरनेट सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे सूचनाओं का सही प्रवाह बाधित हो रहा है और जमीनी हकीकत का पता लगाना मुश्किल होता जा रहा है।
