World War 3: बारूद के ढेर पर खड़ी दुनिया
नई दिल्ली/काराकास: साल 2026 की शुरुआत शांति के बजाय युद्ध के नगाड़ों के साथ हुई है। 3 जनवरी को वेनेजुएला पर अमेरिकी स्ट्राइक (‘ऑपरेशन एब्सल्यूट रिजॉल्व’) और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक राजनीति में नया उबाल ला दिया है। लेकिन यह केवल एक घटना नहीं है; गाजा से लेकर यूक्रेन और सूडान से लेकर भारत की सीमाओं तक, पूरी दुनिया इस समय हिंसा और सैन्य संघर्षों की चपेट में है।
प्रमुख युद्ध क्षेत्र: जहाँ थम नहीं रही तबाही
| संघर्ष | वर्तमान स्थिति | प्रमुख प्रभाव |
| रूस-यूक्रेन | फरवरी 2022 से जारी। | 15 लाख से अधिक सैनिकों की मौत/घायल। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित। |
| इजरायल-हमास | अक्टूबर 2023 से युद्ध जारी। | गाजा में 72,000+ मौतें, 78% इमारतें तबाह। मिडिल ईस्ट में भारी तनाव। |
| सूडान | सेना (SAF) और अर्धसैनिक बल (RSF) में जंग। | 1.5 करोड़ लोग विस्थापित। सबसे बड़ा मानवीय संकट। |
| कांगो-रवांडा | M23 विद्रोहियों का गोमा पर कब्जा। | 90 लाख लोग विस्थापित, जातीय संघर्ष चरम पर। |
भारत और ‘ऑपरेशन सिंदूर’
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पिछले साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया, जिसने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, “आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को हम उसी की भाषा में जवाब देंगे।” भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई देते हुए ‘सुदर्शन चक्र’ जैसे एयर डिफेंस मिशन पर काम शुरू कर दिया है।
आम आदमी की जेब और सफर पर वार
युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, इसका असर आपकी रसोई और वॉलेट पर भी पड़ रहा है:
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महंगाई का दबाव: रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल सप्लाई बाधित हुई है। रेड सी में हूती विद्रोहियों के हमलों से शिपमेंट का रास्ता लंबा हो गया है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है।
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विमानन सेवा (Civil Aviation): जब ऑपरेशन सिंदूर चला, तो भारतीय एयरस्पेस बंद करना पड़ा। इसी तरह, ईरान-इजरायल तनाव के कारण इंटरनेशनल फ्लाइट्स को डायवर्ट करने से प्रति घंटा 10,000 डॉलर का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जिसका बोझ यात्रियों के टिकट पर पड़ रहा है।
युद्ध का नया चेहरा: ड्रोन और सटीक प्रहार
आधुनिक युद्धों ने सेनाओं को लड़ने का नया नजरिया दिया है:
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ड्रोन तकनीक: यूक्रेन से लेकर मिडिल ईस्ट तक ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की भूमिका निर्णायक हो गई है।
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प्रिसिशन अटैक: इजरायल ने जिस तरह हिजबुल्लाह की लीडरशिप को खत्म किया, उसने सटीक हमलों की अहमियत बढ़ा दी है।
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लंबे युद्ध की तैयारी: पहले युद्ध 8-10 दिन के माने जाते थे, अब सालों साल चल रहे हैं।
डिफेंस इंडस्ट्री में आत्मनिर्भर भारत
युद्धों के बीच भारत ने रक्षा क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाई है। 2025 के दौरान रक्षा मंत्रालय ने भारी निवेश को मंजूरी दी है:
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मई 2025: ₹40,000 करोड़ की इमरजेंसी खरीद पावर।
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जुलाई 2025: ₹1.05 लाख करोड़ के सैन्य साजो-सामान की मंजूरी।
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अक्टूबर-दिसंबर 2025: ₹1.58 लाख करोड़ की अतिरिक्त खरीद को हरी झंडी।
- विशेषज्ञ की राय: विदेश मामलों के जानकार कमर आगा के अनुसार, “युद्ध कहीं भी हो, उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। मिडिल ईस्ट में तनाव हमारे एनर्जी पार्टनरशिप (सऊदी, यूएई) के लिए खतरा है, जिससे भारत के आर्थिक हित सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।”
