अंबरनाथ: अजीत पवार के पार्षदों ने पलटा पासा, शिंदे की शिवसेना की सत्ता में वापसी
मुंबई | ठाणे जिले की अंबरनाथ नगरपालिका की राजनीति में पिछले 48 घंटों में भारी उठापटक देखने को मिली है। दो दिन पहले कांग्रेस के 12 पार्षदों को तोड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने वाली भाजपा को शुक्रवार को करारा झटका लगा। कल तक भाजपा के साथ खड़े उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के चार पार्षदों ने अचानक पलटी मारते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दे दिया है। इस उलटफेर के बाद अब बहुमत शिवसेना नीत गठबंधन के पास चला गया है।
कैसे धराशायी हुआ भाजपा का किला?
60 सदस्यीय अंबरनाथ नगरपालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए भाजपा ने एक बड़ी रणनीतिक चाल चली थी।
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गठबंधन का गठन: भाजपा (14 सदस्य) ने कांग्रेस के 12 बागी, राकांपा (अजीत पवार) के 4 और एक निर्दलीय पार्षद को मिलाकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाई थी।
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कांग्रेस पार्षदों का विलय: जब कांग्रेस ने अपने इन 12 पार्षदों को निलंबित किया, तो भाजपा ने उन्हें अपने दल में शामिल कर लिया।
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बदला समीकरण: 24 घंटे के भीतर ही अजीत पवार गुट के 4 पार्षदों और एक निर्दलीय सदस्य ने पाला बदलकर शिवसेना (27 सीटें) का साथ देने का फैसला किया।
इसके परिणामस्वरूप, भाजपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन का ‘कलंक’ तो सहा, लेकिन सत्ता उनके हाथ से फिसल गई। हालांकि, नगरपालिका का अध्यक्ष भाजपा का ही चुना गया है, लेकिन बहुमत खोने के कारण अब उनकी शक्तियां नगण्य हो जाएंगी।
परली में भी भाजपा अलग-थलग: AIMIM के साथ ने बदला समीकरण
अंबरनाथ जैसी ही स्थिति परली नगर निगम में भी देखने को मिली है। वहां फ्लोर लीडर के चुनाव के दौरान भाजपा को दरकिनार कर एक नया त्रिकोणीय गठबंधन सामने आया है।
परली नगर निगम: सीट वितरण और गठबंधन की स्थिति (कुल 35 सीटें)
परली में बहुमत का आंकड़ा 18 है। वर्तमान समीकरणों के अनुसार, राकांपा (अजीत पवार), शिवसेना (शिंदे) और AIMIM का गठबंधन 19 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत में है।
| दल | सीटों की संख्या | स्थिति |
| राकांपा (अजीत पवार) | 16 | गठबंधन (सत्ता पक्ष) |
| भाजपा | 07 | गठबंधन से बाहर (विपक्ष) |
| शिवसेना (शिंदे) | 02 | गठबंधन (सत्ता पक्ष) |
| राकांपा (शरद पवार) | 02 | अन्य |
| कांग्रेस | 01 | अन्य |
| AIMIM | 01 | गठबंधन (सत्ता पक्ष) |
| अन्य | 06 | – |
परली में भाजपा के 7 सदस्यों ने उस गठबंधन से दूरी बना ली जिसमें AIMIM शामिल थी। माना जा रहा है कि भाजपा ने अकोट नगर परिषद की गलती न दोहराने के लिए यह कदम उठाया, जहां AIMIM से जुड़ने पर पार्टी को आलोचना झेलनी पड़ी थी।
प्रमुख राजनीतिक निष्कर्ष
अंबरनाथ और परली के घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता की लड़ाई में वैचारिक मतभेदों के बजाय संख्या बल का खेल अधिक हावी है। अंबरनाथ में जहां भाजपा ने कांग्रेस का साथ लिया, वहीं परली में शिवसेना और राकांपा ने AIMIM के साथ हाथ मिला लिया है।
