बलूच नेता मीर यार ने इजरायल और अफगानिस्तान से मांगी सैन्य मदद

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Balochistan Mir Yar

इस्लामाबाद/बर्लिन: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान को एक अलग देश बनाने की मांग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और तेज़ हो गई है। बलूच नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान से आजादी के अपने अभियान को धार देते हुए इजरायल और अफगानिस्तान को एक खुली चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने दोनों देशों से बलूचिस्तान की आजादी के लिए सक्रिय समर्थन और मदद की गुहार लगाई है।

इजरायल से मदद की अपील: “साझा दुश्मन” का दिया हवाला

मीर यार बलूच ने इजरायल के विदेश मंत्री को संबोधित करते हुए रणनीतिक गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। पत्र की मुख्य बातें:

  • आतंकवाद पर प्रहार: उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा हमास का समर्थन और ईरान के साथ उसका गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। बलूचिस्तान की आजादी से पाकिस्तान की “आतंकवाद निर्यात” करने की क्षमता खत्म हो जाएगी।

  • रणनीतिक लाभ: एक आजाद बलूचिस्तान इजरायल के लिए अरब सागर से मध्य एशिया तक सुरक्षित व्यापारिक रास्ते खोल सकता है।

  • सुरक्षा साझेदारी: मीर यार ने स्पष्ट किया कि बलूचिस्तान की आजादी इजरायल के भू-राजनीतिक हितों के अनुकूल है।

अफगानिस्तान के साथ ‘भाईचारे’ का दांव

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी को लिखे पत्र में मीर यार ने सदियों पुराने सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा:

  • साझा इतिहास: बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते आधुनिक सीमाओं के बनने से बहुत पुराने हैं।

  • विकास की नींव: पाकिस्तानी कब्जे से मुक्त होने के बाद, दोनों राष्ट्र मिलकर क्षेत्र के सबसे स्थिर और विकसित देश बन सकते हैं।

  • क्षेत्रीय शांति: भविष्य में ऊर्जा सहयोग, बुनियादी ढांचा विकास और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया गया है।

अलग ‘बलूच सेना’ का ऐलान और भारत से उम्मीद

यह पहली बार नहीं है जब बलूच नेताओं ने बाहरी मदद मांगी है। मीर यार पहले भी भारत से हस्तक्षेप की अपील कर चुके हैं। इस बार उन्होंने बलूचिस्तान की एक स्वतंत्र सेना बनाने का भी ऐलान किया है, जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सीधे संघर्ष करेगी।

बलूचिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ता असंतोष और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों को इसमें शामिल करने की कोशिशें इस्लामाबाद के लिए बड़ी सिरदर्द बन सकती हैं। अगर इजरायल या अफगानिस्तान की ओर से कोई भी सकारात्मक संकेत मिलता है, तो दक्षिण एशिया का नक्शा बदलने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा।

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