मंजीत पटेल का दावा: कागजों पर बना आठवां वेतन आयोग, पर जमीन पर ऑफिस गायब!

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नई दिल्ली | डिजिटल डेस्क। देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर एक तरफ जहां उम्मीदें जगी हैं, वहीं दूसरी तरफ एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। दावा है कि आयोग का गठन हुए और टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी हुए समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आयोग को अपना कार्यालय (Office) ही नसीब नहीं हुआ है।

यह खुलासा ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने एक साक्षात्कार के दौरान किया है। उनके इस दावे ने सरकार की तैयारियों और नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

“बिना ऑफिस, कहां रखे कर्मचारी अपनी बात?”

डॉ. मंजीत पटेल का कहना है कि तकनीकी रूप से आयोग अस्तित्व में है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर इसका कोई वजूद नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कहा: “परंपरा के अनुसार, जब भी कोई वेतन आयोग बनता है, तो सबसे पहले उसे एक ऑफिस दिया जाता है। वहीं जाकर कर्मचारी संगठन अपने ज्ञापन सौंपते हैं और चेयरपर्सन से मुलाकात करते हैं। अभी न तो चेयरपर्सन रंजना प्रकाश देसाई से कोई बात हो पाई है और न ही सदस्यों से, क्योंकि उनके पास बैठने की कोई जगह ही नहीं है।”

उनका सवाल है कि जब बातचीत का कोई औपचारिक ठिकाना ही नहीं है, तो कर्मचारी संगठन अपनी मांगें और फिटमेंट फैक्टर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा किसके साथ करें?

आठवें वेतन आयोग की अब तक की टाइमलाइन

आयोग के गठन की प्रक्रिया कागजों पर तो तेजी से चली, लेकिन धरातल पर सुस्ती नजर आ रही है:

  • जनवरी 2025: केंद्रीय कैबिनेट ने आठवें वेतन आयोग को मंजूरी दी।

  • 28 अक्टूबर 2025: आयोग के गठन का आधिकारिक ऐलान हुआ।

  • 3 नवंबर 2025: टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किया गया।

  • 31 दिसंबर 2025: सातवें वेतन आयोग की अवधि समाप्त हुई।

  • 1 जनवरी 2026: नियमानुसार इसी तारीख से आठवां वेतन आयोग लागू होना चाहिए।

देरी के पीछे ‘सियासी’ वजह?

मंजीत पटेल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। उनका मानना है कि सरकार जानती है कि आयोग का काम 6 महीने में पूरा हो सकता है, लेकिन इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों तक खींचने की कोशिश की जा सकती है।

कर्मचारियों की उम्मीदें और जमीनी हकीकत

केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से उनकी सैलरी में बंपर उछाल आएगा और फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होगी। लेकिन, जब आयोग के पास अपना ‘पता’ तक नहीं है, तो यह प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और तेज होगी, इस पर संशय बरकरार है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह कब तक आयोग को काम शुरू करने के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराती है।

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