बांग्लादेश: चुनाव से पहले हिंदुओं के ‘नरसंहार’ की धमकी और जलते घर
ढाका/चटगांव: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा का दौर एक बार फिर भयावह रूप ले चुका है। कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद से देश के हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, चटगांव के राउजान में हिंदुओं के नरसंहार की साजिश वाले बैनर मिलने से पूरे देश में दहशत का माहौल है।
1. 2 लाख हिंदुओं और बौद्धों की हत्या की साजिश?
चटगांव के राउजान उप-जिले में हाल ही में कुछ ऐसे बैनर मिले हैं, जिनमें हिंदू और बौद्ध समुदायों के दो लाख लोगों को मारने की योजना का जिक्र है। ‘द संडे गार्जियन’ की रिपोर्ट के अनुसार:
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बैनरों पर लिखा है कि 13 दिसंबर को एक खास योजना के तहत फंडिंग की गई है ताकि राउजान से अल्पसंख्यकों का नामोनिशान मिटाया जा सके।
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पुलिस ने इन बैनरों को जब्त तो कर लिया है, लेकिन स्थानीय समुदायों का आरोप है कि उनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
2. जलते घर और ‘ईशनिंदा’ के झूठे आरोप
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए ‘ईशनिंदा’ (Blasphemy) को हथियार बनाया जा रहा है:
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दीपू चंद्र दास की हत्या: इस महीने दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाकर भीड़ ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी और शव को पेड़ से बांधकर जला दिया।
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राउजान में आगजनी: मंगलवार को अनिल शील के घर को बाहर से बंद कर आग लगा दी गई ताकि पूरा परिवार जिंदा जल जाए। परिवार ने बाड़ काटकर अपनी जान बचाई। ‘BDNEWS24’ के अनुसार, पुलिस को घटनास्थल से केरोसिन और नेताओं के नंबर लिखे कागज मिले हैं।
3. आंकड़ों का मायाजाल: भारत बनाम बांग्लादेश
हिंसा की घटनाओं को लेकर भारत सरकार और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के आंकड़ों में बड़ा अंतर है:
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भारत (विदेश मंत्रालय): अगस्त 2024 से अब तक कम से कम 23 हिंदुओं की मौत हुई है और 152 मंदिरों पर हमले हुए हैं। मोहम्मद यूनुस के कार्यभार संभालने के बाद हिंसा के मामलों की संख्या 2900 के पार बताई गई है।
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बांग्लादेश (प्रेस विंग): बांग्लादेश सरकार इन दावों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मानती है। उनके अनुसार जनवरी से नवंबर 2024 के बीच केवल 138 घटनाएं हुईं, जिनमें 368 घरों पर हमले हुए।
4. फरवरी चुनाव और कट्टरपंथ का बढ़ता प्रभाव
बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में चुनाव होने वाले हैं, लेकिन राजनीतिक समीकरण अल्पसंख्यकों के लिए चिंताजनक हैं:
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अवामी लीग पर प्रतिबंध: शेख हसीना की पार्टी के चुनाव लड़ने पर रोक है, जिससे हिंदुओं का पारंपरिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है।
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कट्टरपंथी एजेंडा: जमात-ए-इस्लामी देश को ‘इस्लामी गणराज्य’ बनाने की घोषणा कर चुकी है। वहीं BNP और जातिया पार्टी जैसे दल शरिया कानूनों को लागू करने और ईशनिंदा के खिलाफ कड़े कानूनों का वादा कर रहे हैं।
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सरकार की चुप्पी: मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर चरमपंथियों को खुली छूट देने के आरोप लग रहे हैं। 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान की चुप्पी भी इस खतरे को और बढ़ा रही है।
5. प्रभावित जिले
वर्तमान में बांग्लादेश के 30 से ज्यादा जिलों में तनाव है। मुख्य रूप से रंगपुर, चांदपुर, चट्टोग्राम (चटगांव), दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, खुलना, कोमिला और सिलहट में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, तोड़फोड़ और गिरफ्तारी के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का अस्तित्व अब एक बड़े राजनीतिक और मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। चुनाव से पहले बढ़ती कट्टरपंथी बयानबाजी और खुलेआम नरसंहार की धमकियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, बांग्लादेश के हिंदू ‘भाग्य’ और ‘डर’ के साये में जीने को मजबूर हैं।
