असम और यूपी ने राष्ट्रीय विकास दर को पछाड़ा

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India's economy

नई दिल्ली: पिछले पाँच वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति की कहानी केवल महानगरों या कुछ चुनिंदा औद्योगिक केंद्रों तक सीमित नहीं रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच कई राज्यों ने जबरदस्त ‘रियल ग्रोथ’ दर्ज की है। जहाँ इस अवधि में देश की कुल रियल जीडीपी 29% बढ़कर 187.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुँची, वहीं देश के टॉप 10 राज्यों ने राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए 45% तक की विकास दर हासिल की है।

असम बना नंबर-1, तमिलनाडु और कर्नाटक भी आगे

आंकड़ों के अनुसार, सबसे तेज़ आर्थिक विकास के मामले में असम पूरे देश में शीर्ष पर रहा है।

  • असम: खेती, तेल-गैस और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के दम पर असम ने 45% की ग्रोथ दर्ज की। इसकी अर्थव्यवस्था 2.4 लाख करोड़ से बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

  • तमिलनाडु: मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर की मजबूती के कारण यह 39% विकास दर के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

  • कर्नाटक: स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी के गढ़ कर्नाटक ने 36% की उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान की बड़ी छलांग

हिंदी भाषी राज्यों में उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने अपनी आर्थिक नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर मज़बूत पकड़ बनाई है।

  • उत्तर प्रदेश: योगी सरकार के दौर में यूपी की अर्थव्यवस्था 35% की दर से बढ़कर 15.8 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गई है। औद्योगिक कॉरिडोर और विशाल घरेलू बाज़ार इसके मुख्य आधार रहे हैं।

  • राजस्थान: माइनिंग और रिन्यूएबल एनर्जी (सौर ऊर्जा) के क्षेत्र में काम करते हुए राजस्थान ने 34% की विकास दर दर्ज की है।

बिहार और आंध्र प्रदेश का मज़बूत प्रदर्शन

आंकड़े बताते हैं कि विकास की यह लहर पूर्वी और दक्षिणी भारत में भी समान रूप से प्रभावी है।

  • बिहार और आंध्र प्रदेश: दोनों राज्यों ने 33% की विकास दर हासिल की है। बिहार जहाँ कृषि और सेवा क्षेत्र में आगे बढ़ा, वहीं आंध्र प्रदेश ने पोर्ट्स और फूड प्रोसेसिंग के दम पर अपनी जीडीपी में इज़ाफा किया।

  • छत्तीसगढ़ और झारखंड: खनिज संसाधनों से समृद्ध इन दोनों राज्यों ने भारी उद्योगों और बिजली उत्पादन के सहारे 31% की तरक्की की है।

  • तेलंगाना: आईटी और फार्मा सेक्टर की बदौलत तेलंगाना 30% ग्रोथ के साथ टॉप 10 की सूची में शामिल है।

विकास का बदलता स्वरूप

RBI के ये आंकड़े सिद्ध करते हैं कि भारत अब एक ‘सेंट्रलाइज्ड’ इकोनॉमी के बजाय ‘को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म’ के जरिए आगे बढ़ रहा है। हर राज्य अपनी भौगोलिक और औद्योगिक विशिष्टताओं (जैसे- असम का गैस, राजस्थान का पर्यटन, और यूपी का लॉजिस्टिक्स) का लाभ उठाकर देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दे रहा है।

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