हवा साफ करने की जगह ‘आंकड़े साफ’ करने में जुटी रही पिछली सरकार: आशीष सूद

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ashish shud

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदूषण के मुद्दे पर विपक्ष और पिछली कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिल्ली की खराब हवा कोई मौसमी या पिछले 10 महीनों की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी जटिल समस्या है जिसका बड़ा हिस्सा पड़ोसी राज्यों से आता है। सूद ने आरोप लगाया कि दिल्ली की हवा सुधारने के बजाय आंकड़ों के साथ हेरफेर कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई।

ग्रीन बेल्ट में लगाए गए AQI मीटर

मंत्री ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि 2017-18 में जानबूझकर 20 नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन ऐसी जगहों पर लगाए गए जहाँ हरियाली अधिक है, ताकि प्रदूषण के आंकड़े कम दिखें। उन्होंने बताया कि असोला वन्यजीव अभयारण्य, अलीपुर और नजफगढ़ जैसे ग्रामीण व हरित क्षेत्रों में 30% स्टेशन लगाए गए। सीएजी (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों का चयन सीपीसीबी के नियमों के अनुसार नहीं था, जिससे दिल्ली का एक्यूआई डेटा अविश्वसनीय हो गया है।

बुनियादी सुधार के बजाय पीआर पर जोर

सूद ने कहा कि एनजीटी (NGT) ने भी दिल्ली सरकार को ‘ऑड-ईवन’ जैसी योजनाओं के लिए फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा, “जब सरकार के पास सुधार के 100 विकल्प थे, तो उन्होंने केवल पीआर स्टंट वाली योजनाओं को चुना। ‘रेड लाइट पर इंजन बंद’ करना जैसे कदम केवल राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए थे, वैज्ञानिक समाधान के लिए नहीं।”

सार्वजनिक परिवहन की अनदेखी

गृह मंत्री ने बुनियादी ढांचे के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो सड़कों पर धूल हटाने के लिए स्वीपिंग मशीनें लगाई जातीं और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर काम होता। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने केंद्र की आरआरटीएस (RRTS) और मेट्रो फेज की परियोजनाओं में बाधाएं खड़ी कीं। सूद ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के पास सार्वजनिक परिवहन के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन विज्ञापनों पर खर्च करने के लिए करोड़ों रुपये थे।

विपक्ष पर तंज

हाल के दिनों में हमलावर रहे विपक्षी नेताओं को मंत्री ने ‘बेरोजगार नेता’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ये लोग रातों-रात ईवीएम, कोयला और न्यूक्लियर पावर के विशेषज्ञ बन जाते हैं, जबकि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए क्योंकि यह हमारे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है।

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