इथियोपिया में पीएम मोदी का भव्य स्वागत: रेड कार्पेट की जगह एयरपोर्ट पर महकी पारंपरिक कॉफी

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अदिस अबाबा: आमतौर पर जब किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो रेड कार्पेट, औपचारिक रस्में और गार्ड ऑफ ऑनर उनका स्वागत करते हैं। लेकिन इथियोपिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रोटोकॉल से हटकर एक बेहद आत्मीय और अनोखा स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने एयरपोर्ट पर ही अपने देश की सबसे पवित्र परंपरा—’कॉफी सेरेमनी’—का आयोजन कर पीएम मोदी का स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच की घनिष्ठता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पीएम अबी अहमद खुद अपनी गाड़ी ड्राइव करके पीएम मोदी को होटल तक ले गए।

इथियोपियाई संस्कृति में कॉफी: ‘जीवन का उत्सव’ इस कॉफी सेरेमनी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इथियोपिया में कॉफी महज एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि सम्मान, भरोसे और आपसी रिश्तों की गहराई का प्रतीक है। पीएम मोदी के लिए इस रस्म का आयोजन करना भारत और इथियोपिया के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। यहां एक प्रचलित कहावत है—”बुना डाबो नाव” (Buna dabo naw), जिसका अर्थ है ‘कॉफी हमारी रोटी है’। यह बताता है कि वहां के जनजीवन में कॉफी का स्थान गंगा नदी की तरह ही पवित्र और महत्वपूर्ण है। यह रस्म समुदाय को जोड़ने, बुजुर्गों का सम्मान करने और मेहमान को भगवान का दर्जा देने का तरीका है।

कैसी होती है यह पारंपरिक रस्म? आधुनिक ‘इंस्टेंट कॉफी’ के दौर में इथियोपियाई कॉफी सेरेमनी एक धीमी और विस्तृत प्रक्रिया है, जो करीब एक से दो घंटे तक चलती है।

  1. तैयारी: पारंपरिक सफेद पोशाक ‘हबेशा केमिस’ पहने महिलाएं इसे संपन्न करती हैं। सबसे पहले कच्ची हरी कॉफी बीन्स को धोकर कोयले की आंच पर भूना जाता है।

  2. स्मोक टेस्टिंग: जैसे ही बीन्स भुनती हैं, उनकी खुशबू चारों तरफ फैल जाती है। मेहमानों के पास धुएं को ले जाकर उन्हें इसकी महक (स्मोक टेस्टिंग) महसूस कराई जाती है।

  3. पकाना: इसके बाद बीन्स को लकड़ी की ओखली (जेनेजेना) में कूटकर मिट्टी के विशेष बर्तन ‘जेबेना’ में उबाला जाता है।

तीन कप और उनका गहरा अर्थ इस रस्म में तीन कप कॉफी पीने की परंपरा है, जिसका अपना विशेष महत्व है:

  • पहला कप (अबोल): यह सबसे गाढ़ा और शक्तिशाली होता है। इसे पीना अनिवार्य माना जाता है।

  • दूसरा कप (टोना): यह आपसी बातचीत और विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।

  • तीसरा कप (बराका): इसका अर्थ है ‘आशीर्वाद’। इसे पीने से बुजुर्गों और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। पीएम मोदी को यह सम्मान देना उन्हें एक ‘रणनीतिक मित्र’ से बढ़कर ‘परिवार के सदस्य’ जैसा दर्जा देना है।

इतिहास: बकरियों से शुरू हुआ सफर इथियोपिया को कॉफी का जन्मस्थान माना जाता है। इसके पीछे 9वीं सदी की एक दिलचस्प कहानी है। ‘कल्दी’ नाम के एक चरवाहे ने देखा कि कुछ लाल बेरी खाने के बाद उसकी बकरियां असामान्य ऊर्जा से भर गईं। उत्सुकतावश उसने भी वो फल खाया और खुद को तरोताजा महसूस किया। जब वह इन बीजों को एक मठ में ले गया, तो भिक्षुओं ने इसे ‘शैतान का फल’ बताकर आग में फेंक दिया। लेकिन आग में भुनने पर जो खुशबू आई, उसने सबका मन मोह लिया। फिर बीजों को उबालकर दुनिया की पहली ‘अरेबिका कॉफी’ तैयार हुई।

विश्व प्रसिद्ध कॉफी किस्में इथियोपिया के अलग-अलग क्षेत्रों की कॉफी का स्वाद भी अलग है:

  • यिरगाचेफे (दक्षिणी इथियोपिया): यहां दुनिया की सबसे बेहतरीन बीन्स उगती हैं। इसमें फूलों जैसी महक, खट्टापन (Citrus) और चाय जैसा हल्का स्वाद होता है।

  • सिदामो: यह भी दक्षिणी क्षेत्र से है। इसमें मीडियम बॉडी, तेज एसिडिटी और प्राकृतिक मिठास होती है। इसका स्वाद बेरी, मसालों और चॉकलेट का मिश्रण होता है।

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