जॉर्डन की राजशाही का भारत से खास रिश्ता, कोलकाता से है जुड़ाव
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जॉर्डन यात्रा के दौरान भारत और शाही हाशमाइट किंगडम के बीच संबंधों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अम्मान के अल-हुसैनिया पैलेस में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II बिन अल हुसैन के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।
कूटनीतिक संबंधों के अलावा, जॉर्डन के शाही परिवार का भारत से एक विशेष और व्यक्तिगत जुड़ाव भी है, जिसका कारण राजकुमारी सरवत अल हसन हैं।
कोलकाता में जन्मीं राजकुमारी सरवत
राजकुमारी सरवत अल हसन का जन्म 1947 में भारत के विभाजन से कुछ सप्ताह पहले कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उनका नाम सरवत इकरामुल्ला था। वे ब्रिटिश-शासित भारत के एक प्रमुख और प्रभावशाली बंगाली-मुस्लिम वंश, सुहरावर्दी परिवार से आती हैं।
उनके पिता, मोहम्मद इकरामुल्ला, भारतीय सिविल सेवा में थे और बाद में पाकिस्तान के पहले विदेश सचिव बने। उनकी मां, शैस्ता सुहरावर्दी इकरामुल्ला, पाकिस्तान की पहली महिला सांसदों में से एक थीं और मोरक्को में राजदूत भी रहीं।
लंदन से जॉर्डन तक का सफर
सरवत इकरामुल्ला की पढ़ाई ब्रिटेन में हुई और उनका पालन-पोषण यूरोप और दक्षिण एशिया में अपने पिता की कूटनीतिक पोस्टिंग के दौरान हुआ। वह पहली बार लंदन में राजनयिक हलकों में जॉर्डन के हशेमाइट राजवंश के प्रिंस हसन बिन तलाल से मिलीं।
भारत में जन्मीं, पाकिस्तान में शादी
28 अगस्त, 1968 को सरवत इकरामुल्ला ने पाकिस्तान के कराची में प्रिंस तलाल से शादी की। यह विवाह समारोह पाकिस्तानी, जॉर्डन और पश्चिमी परंपराओं का एक अनूठा मिश्रण था। इसके बाद यह दंपति अम्मान में बस गया और उनके चार बच्चे हैं।
शिक्षा और समाज कल्याण में योगदान
प्रिंसेस सरवत 1968 से 1999 तक जॉर्डन की क्राउन प्रिंसेस रहीं। अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा, सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने जॉर्डन के पहले द्विभाषी इंटरनेशनल बैकलॉरिएट संस्थान, अम्मान बैकलॉरिएट स्कूल (1981) की सह-स्थापना की। इसके अलावा, उन्होंने विशेष शिक्षा केंद्र (1974) और प्रिंसेस सरवत कम्युनिटी कॉलेज (1980) की स्थापना की, जो युवा महिलाओं और विकलांगों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।
खेल और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
प्रिंसेस सरवत ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल करने वाली जॉर्डन की पहली महिला हैं और उन्होंने जॉर्डन बैडमिंटन फेडरेशन की मानद अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। 1999 में किंग हुसैन ने अपने बेटे प्रिंस अब्दुल्ला को उत्तराधिकारी बनाया, जिसके बाद प्रिंस हसन का क्राउन प्रिंस के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया।
प्रिंसेस सरवत के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। उन्हें वुमन ऑफ पीस अवार्ड (1995), ग्रैंड कॉर्डन ऑफ द रेनेसां (1994), और पाकिस्तान का हिलाल-ए-इम्तियाज (2002) जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू ब्रंसविक से उन्हें मानद उपाधियां भी प्राप्त हुई हैं।
