चीन–जापान में बढ़ा तनाव, योनागुनी द्वीप पर मिसाइल तैनात करने की जापान की योजना

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नई दिल्ली। ताइवान को लेकर चीन और जापान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। योनागुनी द्वीप पर मिसाइल तैनात करने की जापान की योजना पर चीन ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे “बेहद खतरनाक कदम” बताया है। यह द्वीप ताइवान से मात्र 110 किलोमीटर दूर स्थित है, जिस कारण यह निर्णय क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

चीन ने जापान के कदम को बताया उकसावे वाला

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को कहा कि ताइवान के नजदीक जापान द्वारा आक्रामक हथियारों की तैनाती “जानबूझकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने” और “सैन्य टकराव भड़काने” जैसी कार्रवाई है।

माओ ने जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की हाल की ताइवान संबंधी टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह “अत्यंत खतरनाक व्यवहार” है और जापानी दक्षिणपंथी तत्व देश को दोबारा सैन्यवाद की ओर धकेल रहे हैं, जो पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।

जापानी रक्षा मंत्री का बयान

योनागुनी द्वीप स्थित जापानी सैन्य अड्डे का निरीक्षण करने के बाद जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने कहा कि मिसाइल सिस्टम की यह तैनाती जापान पर संभावित हमले की आशंका को कम करेगी।

उन्होंने यह दावा भी खारिज किया कि इस कदम से क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा। जापान टाइप-03 मध्यम दूरी की सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली की तैनाती की योजना पर काम कर रहा है, जो युद्धक विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम है।

ताइवान के आसपास भू-राजनीतिक हलचल तेज

ताइवान को लेकर अमेरिका, जापान और अन्य सहयोगी देशों की बढ़ती सक्रियता से चीन पहले ही नाराज है। ऐसे में ताइवान से करीब स्थित द्वीप पर जापान की सैन्य मजबूती बीजिंग को और अधिक चुभ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नए रणनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।

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