जापानी पीएम साने ताकाइची पर हिंसक टिप्पणी, चीन-जापान के रिश्तों में तनाव
टोक्यो। जापान और चीन के बीच राजनयिक तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। ओसाका में तैनात चीनी महावाणिज्य दूत जू जियान (Xu Jian) ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) के खिलाफ हिंसक और भड़काऊ टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि “मेरे पास उसकी गर्दन काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।” जू की यह टिप्पणी ताकाइची के हालिया बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने ताइवान पर चीन की नाकेबंदी को जापान के लिए ‘अस्तित्वगत खतरा’ बताया था।
क्यों भड़का चीन
पिछले महीने पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा था कि “यदि चीन ताइवान की नाकेबंदी करता है, तो यह जापान की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा होगा, और हमें अपनी आत्मरक्षा बल (Self Defense Forces) तैनात करनी पड़ सकती है।” दरअसल, ताइवान जापान के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र से सिर्फ 60 मील (लगभग 100 किमी) की दूरी पर है। चीन इसे अपना प्रांत मानता है, जबकि जापान और पश्चिमी देश इसे एक लोकतांत्रिक साझेदार के रूप में देखते हैं।
जू जियान का विवादित बयान
चीनी डिप्लोमेट जू जियान ने रविवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा — “वह गंदी गर्दन जो खुद मेरे सामने आई है, मेरे पास बिना किसी झिझक के उसे काट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं।” हालांकि यह पोस्ट कुछ ही घंटों में हटा दी गई, लेकिन तब तक यह जापानी मीडिया और राजनीतिक हलकों में आक्रोश का विषय बन गई थी।
जापान की कड़ी प्रतिक्रिया
जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा (Minoru Kihara) ने इसे “बेहद अनुचित और अस्वीकार्य बयान” बताते हुए बीजिंग के समक्ष औपचारिक विरोध (Formal Protest) दर्ज कराया। किहारा ने कहा — “जू ने अतीत में भी कई भड़काऊ टिप्पणियां की हैं। हमने चीन सरकार से तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।”
चीन का जवाब और संकेत
हालांकि जू ने पोस्ट हटा दी, लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने राजनयिक का बचाव किया। प्रवक्ता लिन जियान (Lin Jian) ने कहा — “जू के बयान ताकाइची की ताइवान पर गलत और खतरनाक टिप्पणियों के जवाब में थे। जापान को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।” इस रुख से संकेत मिलता है कि बीजिंग फिलहाल अपने अधिकारी के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाएगा।
तनाव बढ़ने की आशंका
इस विवाद ने एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं — चीन और जापान — के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है।
दोनों देशों के बीच:
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ताइवान का मुद्दा,
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पूर्वी चीन सागर में द्वीपीय विवाद (Senkaku Islands),
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और अमेरिका की Indo-Pacific रणनीति में जापान की भूमिका
पहले ही मतभेद का कारण रहे हैं।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि ताइवान पर किसी संभावित चीनी हमले की स्थिति में
जापान की सैन्य भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
