ट्रंप ने हमले की धमकी, तेहरान बोला ‘समंदर में काट देंगे इंटरनेट केबल’
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की संभावना जताई है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बना सकता है। इससे इंटरनेट सेवाओं, वित्तीय लेनदेन और तकनीकी कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है।
ट्रंप ने फिर सैन्य कार्रवाई के दिए संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ अभियान चला सकता है। यह उस सैन्य अभियान के नाम का संदर्भ था, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी।
हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नया हमला कब होगा, उसका दायरा क्या होगा या किन ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
इससे पहले ट्रंप कह चुके हैं कि अमेरिका युद्ध को जल्द समाप्त कर सकता है। लेकिन संघर्ष को लेकर उनके बयानों और समयसीमा में बदलाव के कारण स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
ईरान की चेतावनी: समुद्र के नीचे की केबल भी निशाने पर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के नए हमले की स्थिति में ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर चुका है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को संभावित निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
ये फिलहाल ईरानी अधिकारियों के बयान और चेतावनियां हैं। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि केबलों पर हमला हो चुका है या इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गई हैं।
इंटरनेट केबल कटने से क्या होगा?
समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट संचार की रीढ़ हैं। इनके जरिए डेटा, वीडियो कॉल, बैंकिंग लेनदेन और क्लाउड सेवाओं का बड़ा हिस्सा एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है।
यदि खाड़ी क्षेत्र में कई केबल क्षतिग्रस्त होती हैं, तो संभावित असर इस प्रकार हो सकते हैं:
- इंटरनेट की गति: कुछ देशों और क्षेत्रों में इंटरनेट धीमा हो सकता है।
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: अंतरराष्ट्रीय डिजिटल लेनदेन में देरी या रुकावट आ सकती है।
- ऑनलाइन कारोबार: ई-कॉमर्स, क्लाउड सेवाओं और कंपनियों के नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं।
- मरम्मत में देरी: युद्ध और समुद्री सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण केबलों की मरम्मत मुश्किल हो सकती है।
हालांकि, प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी केबलें क्षतिग्रस्त होती हैं और इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी जल्दी भेजा जा सकता है।
क्या पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है?
नहीं, केवल होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास केबलों को नुकसान पहुंचने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाना जरूरी नहीं है। वैश्विक इंटरनेट कई समुद्री और जमीनी नेटवर्कों के जरिए चलता है।
लेकिन खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कनेक्टिविटी कमजोर हो सकती है। यदि एक साथ कई महत्वपूर्ण केबलें प्रभावित होती हैं, तो इंटरनेट सेवाओं, कारोबार और डेटा सेंटरों पर दबाव बढ़ सकता है।
कई देशों ने नए हमले से बचने की अपील की
ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर क्षेत्रीय और यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है। इस्तांबुल में हुई बैठक के बाद तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने चेतावनी दी कि नया हमला संघर्ष को पूरे क्षेत्र में फैला सकता है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने भी तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई।
जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान के साथ बातचीत के जरिए परमाणु मुद्दे का समाधान निकालने की इच्छा भी जताई है।
खाड़ी देशों के तकनीकी निवेश पर भी खतरा
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश कर रहे हैं। ऐसे में समुद्री संचार केबलों या तकनीकी ढांचे पर हमला इन देशों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
खाड़ी देशों और तकनीकी कंपनियों के पास वैकल्पिक नेटवर्क भी हैं, लेकिन युद्ध के दौरान कई मार्गों का एक साथ प्रभावित होना चुनौती पैदा कर सकता है।
फिलहाल अमेरिका की ओर से किसी नए हमले की निश्चित तारीख या लक्ष्य घोषित नहीं किया गया है। वहीं, इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की ईरानी चेतावनी भी संभावित जवाबी कार्रवाई के संदर्भ में सामने आई है।
