इंडोनेशिया के जंगलों में भीषण आग, आसमान हुआ नारंगी
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशिया में जंगलों की आग ने गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर दिया है। इंडोनेशिया के मध्य कालीमंतन समेत कई क्षेत्रों में आग से उठने वाले धुएं ने आसमान को नारंगी रंग में बदल दिया है। धुएं की मोटी परत इंडोनेशिया से निकलकर मलेशिया और सिंगापुर तक पहुंच रही है। कई जगह दृश्यता कम हो गई है और लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
अल नीनो और सूखे ने बढ़ाई आग की समस्या
इंडोनेशिया में हर साल शुष्क मौसम के दौरान जंगलों में आग लगती है, लेकिन इस साल सूखे की गंभीरता ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश कम हुई है। सूखी वनस्पति और जमीन के नीचे मौजूद पीट की परतें आग के तेजी से फैलने का कारण बन रही हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया इस साल 2015 के बाद अपने सबसे गंभीर जंगल की आग के मौसम का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों ने पीटलैंड के क्षरण, वनों की कटाई और जमीन साफ करने के लिए आग लगाने की गतिविधियों को भी इस संकट की वजह बताया है।
आसमान नारंगी क्यों दिखाई दे रहा है?
जंगलों में लगी आग से निकलने वाले धुएं और बारीक कणों की बड़ी मात्रा वातावरण में फैल जाती है। ये कण सूर्य की रोशनी के बिखरने के तरीके को प्रभावित करते हैं। जब धुआं घना होता है, तो दिन में भी आसमान नारंगी या पीला दिखाई दे सकता है।
इंडोनेशिया के मध्य कालीमंतन क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में धुएं की मोटी परत के कारण आसमान का रंग बदला हुआ नजर आया। यह केवल दृश्य बदलाव नहीं है, बल्कि वातावरण में धुएं और प्रदूषक कणों की मौजूदगी का संकेत भी है।
सिंगापुर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर
इंडोनेशिया की आग से उठने वाला धुआं सिंगापुर तक पहुंच गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, 14 अक्टूबर को सिंगापुर के पश्चिमी हिस्से में एक घंटे का PM2.5 स्तर लगभग 284 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। यह वहां दर्ज किए गए इस साल के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक था।
PM2.5 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर पहुंच सकते हैं। इनसे आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी और पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
स्कूल बंद, लाखों लोग स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान
धुएं का असर केवल इंडोनेशिया तक सीमित नहीं है। पूर्वी तिमोर में 15 अक्टूबर से तीन दिनों के लिए स्कूलों में आमने-सामने की पढ़ाई बंद करने का फैसला लिया गया। क्षेत्र के कुछ हिस्सों में वायु प्रदूषण बढ़ने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।
इंडोनेशिया के अधिकारियों के मुताबिक, 13 अक्टूबर तक आग और धुएं से प्रभावित सात प्रांतों में सांस संबंधी समस्याओं के 2,83,270 मामले दर्ज किए गए थे। यह आंकड़ा संकट के स्वास्थ्य पर पड़ रहे व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
आग बुझाने के लिए हजारों कर्मचारी तैनात
इंडोनेशिया की सरकार आग पर काबू पाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, आग से निपटने के लिए तैनात कर्मियों की संख्या बढ़ाकर 69 हजार से अधिक कर दी गई है। इसके बावजूद सूखे पीटलैंड में लगी आग बुझाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
पीट की जमीन में आग कई बार सतह के नीचे सुलगती रहती है। ऊपर से आग बुझती हुई दिखाई देने के बावजूद नीचे मौजूद गर्म हिस्सों से दोबारा लपटें उठ सकती हैं। इससे आग पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
धुआं रोकने के लिए ड्राई आइस का प्रयोग
आग से पैदा हुए धुएं और सूखे से निपटने के लिए इंडोनेशिया में कुछ नए उपाय भी आजमाए जा रहे हैं। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण सुमात्रा में अधिकारियों ने ड्राई आइस यानी ठोस कार्बन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल का प्रयोग शुरू किया है। इसका उद्देश्य बादलों के निर्माण में मदद करके बारिश की संभावना बढ़ाना है।
हालांकि, इस तकनीक से स्थानीय स्तर पर कितनी राहत मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जंगलों की आग, सूखे पीटलैंड और जमीन साफ करने के लिए आग लगाने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल रहेगा।
लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
प्रदूषण और धुएं से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
- धुआं अधिक होने पर बाहर निकलने और खुले में व्यायाम करने से बचें।
- बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें।
- संभव हो तो खिड़कियां बंद रखें और घर के अंदर की हवा को साफ रखने के उपाय करें।
- सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में दर्द या लगातार घुटन महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
इंडोनेशिया के जंगलों की आग अब क्षेत्रीय पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। नारंगी आसमान और जहरीले धुएं की तस्वीरें इस संकट की गंभीरता दिखाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आग बुझाने के साथ-साथ पीटलैंड की बहाली, जंगलों की सुरक्षा और आग लगाकर जमीन साफ करने पर प्रभावी नियंत्रण भी जरूरी है।
