केरल में ABVP का बड़ा उलटफेर, SFI के 40 साल पुराने गढ़ में क्लीन स्वीप

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तिरुवनंतपुरम। केरल में छात्र राजनीति से जुड़ा एक बड़ा चुनावी नतीजा सामने आया है। त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है। इस परिणाम के साथ कॉलेज में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व का अंत हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कॉलेज को SFI के मजबूत गढ़ के रूप में देखा जाता रहा है और वहां करीब चार दशक से उसका प्रभाव रहा है।

सभी प्रमुख पदों पर ABVP का कब्जा

चुनाव में ABVP की स्निग्धा एम. हरि को चेयरपर्सन चुना गया, जबकि आदित्य टी. ए. ने वाइस चेयरपर्सन पद पर जीत हासिल की।

इसके अलावा विग्नेश भट्ट जनरल सेक्रेटरी, विग्नेश डी. मैगजीन एडिटर और अंजलि टी. आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी चुनी गईं।

निवेद्या के. एन. ने यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर का पद जीता। वहीं शिवानी आर. और अवनी सी. बी. क्रमशः सेकंड यूजी और सेकंड पीजी प्रतिनिधि चुनी गईं।

कुछ रिपोर्टों में चुनाव के परिणाम को सभी 12 सामान्य सीटों पर ABVP की जीत के रूप में भी बताया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में छह प्रमुख पदों पर जीत का उल्लेख है। इसलिए उपलब्ध स्रोतों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ABVP ने छात्रसंघ के सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की।

चार दशक पुराने SFI प्रभाव का अंत

त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में SFI लंबे समय से छात्रसंघ की राजनीति में प्रभावशाली रहा है। इस बार ABVP के पूरे पैनल की जीत को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह नतीजा ऐसे समय आया है जब त्रिपुनिथुरा क्षेत्र की स्थानीय राजनीति में भी बदलाव देखने को मिला है। हाल में त्रिपुनिथुरा नगरपालिका में BJP ने सत्ता संभाली है और इससे स्थानीय निकाय में वाम दलों का करीब 45 साल पुराना शासन समाप्त हुआ।

ABVP ने SFI पर लगाए ये आरोप

जीत के बाद ABVP ने इसे SFI की कथित ‘छात्र-विरोधी नीतियों’ की अस्वीकृति बताया। संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि इस जीत से केरल के अन्य कॉलेज परिसरों में काम कर रही ABVP इकाइयों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

ABVP ने पिछली SFI-समर्थित यूनियन पर संस्कृत भाषा और उससे जुड़े कार्यक्रमों को पर्याप्त बढ़ावा नहीं देने का आरोप लगाया। संगठन ने छात्रों से जुटाए गए फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए और कहा कि पिछली यूनियन के कार्यकाल में पर्याप्त छात्र कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए।

ये दावे ABVP की ओर से चुनाव परिणाम के बाद किए गए हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों पर SFI की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

केरल के कैंपस में बदला राजनीतिक समीकरण?

त्रिपुनिथुरा कॉलेज का परिणाम ऐसे समय आया है जब देश के कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में भी ABVP की चुनावी गतिविधियां चर्चा में रही हैं। हालांकि अलग-अलग परिसरों के चुनाव परिणामों को पूरे राज्य के छात्र राजनीतिक रुझान का प्रतिनिधि मानने से पहले प्रत्येक चुनाव के स्थानीय संदर्भ और परिणामों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

फिलहाल त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में हुआ परिणाम निश्चित रूप से वहां के छात्रसंघ के नेतृत्व में बदलाव को दर्शाता है। आने वाले समय में नई यूनियन कॉलेज के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और छात्र हित से जुड़े मुद्दों पर क्या प्राथमिकताएं तय करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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