बेडशीट-कंबल चोरी में राजस्थान का बीकानेर रेल मंडल देश में नंबर वन!
बीकानेर/नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की एसी (AC) ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों द्वारा बेडरोल (चादर, कंबल, तकिया और तौलिया) चोरी करने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक RTI (सूचना का अधिकार) से हुए सनसनीखेज खुलासे के मुताबिक, देश भर के 69 रेल मंडलों में से राजस्थान का बीकानेर रेल मंडल बेडरोल चोरी के मामले में पहले स्थान पर रहा है। वहीं, राज्य का ही जोधपुर रेल मंडल भी टॉप-5 में शुमार है।
करोड़ों रुपये का हुआ नुकसान
RTI रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच (करीब साढ़े चार वर्षों में) सिर्फ बीकानेर और जोधपुर रेल मंडलों से लाखों की संख्या में बेडरोल गायब हुए हैं:
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बीकानेर रेल मंडल: यहाँ से 25.76 लाख बेडरोल आइटम चोरी हुए।
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जोधपुर रेल मंडल: यहाँ से 8.09 लाख बेडरोल आइटम गायब हुए।
अगर राष्ट्रीय स्तर की बात करें, तो इस अवधि में देश की विभिन्न ट्रेनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल के सामान गायब हो चुके हैं, जिससे बेडरोल ठेकेदारों को 104.51 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान हुआ है।
चोरों की पहली पसंद: बीकानेर में चादर तो जोधपुर में कंबल
RTI के आंकड़ों से पता चला है कि अलग-अलग मंडलों में चोरों की पसंद भी अलग-अलग रही:
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बीकानेर मंडल: यहाँ चोरी हुए 25.76 लाख सामानों में से अकेले 12.42 लाख बेडशीट (चादर) हैं, जो कुल चोरी का लगभग 50% है।
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जोधपुर मंडल: यहाँ चोरों की पहली पसंद कंबल रहे। जोधपुर में सबसे ज्यादा 3.40 लाख से अधिक कंबल गायब हुए, जो कुल चोरी का 42 प्रतिशत है।
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जयपुर मंडल: राजधानी जयपुर भी इस सूची में पीछे नहीं है। जयपुर मंडल में 2.52 लाख फेस टॉवल (तौलिए) चोरी हुए, जो वहाँ की कुल चोरी का 56% है।
3 साल में 4 गुना बढ़े मामले
चिंता की बात यह है कि बीकानेर रेल मंडल में बेडरोल चोरी के मामलों में बहुत तेज बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022 में जहाँ लगभग 2.99 लाख सामान चोरी हुए थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 12.34 लाख तक पहुंच गई—यानी तीन साल में करीब चार गुना की वृद्धि। इसी तरह, जोधपुर मंडल में भी चोरी के मामलों में 46 प्रतिशत का उछाल देखा गया है।
गरीब कोच अटेंडेंट्स पर गिर रही गाज
इस चोरी का सबसे दर्दनाक असर ट्रेनों में तैनात गरीब कोच अटेंडेंट और बेडरोल ठेकेदारों पर पड़ रहा है। रेलवे नियमों के मुताबिक, गायब सामान की कीमत ठेकेदारों के भुगतान से काटी जाती है। कई मामलों में ठेकेदार इस नुकसान की भरपाई सीधे गरीब कर्मचारियों के वेतन से करते हैं, जिसके चलते अटेंडेंट्स के वेतन से हर महीने 2,000 से 3,000 रुपये तक की कटौती हो रही है।
रेलवे के लिए बड़ी चुनौती
रेल मंत्रालय ने इस चोरी को रोकने के लिए ट्रेनों में सीसीटीवी निगरानी, ‘कोच मित्र’ ऐप, कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन और यात्रियों के स्टेशन पहुँचने से पहले ही बेडरोल वापस कलेक्ट करने जैसी सख्त व्यवस्थाएं लागू की हैं। इसके बावजूद बीकानेर और जोधपुर रेल मंडलों के ये आंकड़े रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
