रिश्वतखोर CGST अफसरों पर ED का कड़ा प्रहार: संपत्तियों की जांच शुरू
लखनऊ | राजधानी लखनऊ में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सीजीएसटी (CGST) के उन अधिकारियों पर शिकंजा कस दिया है, जिन्हें हाल ही में सीबीआई ने रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी ने अब इन अधिकारियों द्वारा बनाई गई अवैध संपत्तियों की पहचान और उन्हें कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने इन अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी को संदेह है कि रिश्वत के रूप में ली गई बड़ी रकम को रियल एस्टेट और बेनामी निवेश के जरिए सफेद करने की कोशिश की गई है।
संपत्तियों का ब्योरा तलब
जांच को प्रभावी बनाने के लिए ईडी ने लखनऊ और आसपास के जिलों के रजिस्ट्रार कार्यालयों और बैंकों को पत्र लिखकर आरोपी अधिकारियों और उनके परिजनों के नाम दर्ज संपत्तियों का विवरण मांगा है। जांच के दायरे में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
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अचल संपत्ति: अधिकारियों द्वारा खरीदे गए लग्जरी फ्लैट, प्लॉट और कमर्शियल संपत्तियां।
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बैंक और लॉकर: बैंक खातों के लेन-देन का इतिहास और लॉकरों में रखे गए गहनों व नकदी का विवरण।
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बेनामी निवेश: क्या अधिकारियों ने अपने करीबियों या रिश्तेदारों के नाम पर पैसे निवेश किए हैं।
सीबीआई की कार्रवाई से शुरू हुआ मामला
यह पूरा प्रकरण तब सामने आया जब सीबीआई की टीम ने लखनऊ में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सीजीएसटी के वरिष्ठ अधिकारियों को एक व्यापारी से लाखों रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि ये अधिकारी व्यापारियों को डरा-धमकाकर अवैध वसूली का एक रैकेट चला रहे थे।
जब्त हो सकती है संपत्ति
ईडी की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ यानी अपराध की कमाई को जब्त करना है। यदि यह प्रमाणित हो जाता है कि संपत्तियां रिश्वत के पैसे से अर्जित की गई हैं, तो ईडी उन्हें अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर देगी, जिसके बाद इन्हें सरकारी खजाने में शामिल करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
