भारत-US व्यापार समझौता: कैंसर की दवाएं और अमेरिकी बादाम-पिस्ता होंगे सस्ते

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India-US trade agreement

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के फ्रेमवर्क की जानकारी साझा की। इस समझौते के तहत कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं से लेकर अमेरिकी बादाम और पिस्ता तक कई उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को या तो पूरी तरह खत्म किया जाएगा या भारी कटौती की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी राहत

समझौते के तहत, भारत ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और कुछ महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों पर ‘जीरो टैरिफ’ लगाने का निर्णय लिया है। इससे देश के लाखों मरीजों को राहत मिलेगी और गंभीर बीमारियों का इलाज पहले की तुलना में काफी सस्ता हो जाएगा।

रसोई और खान-पान पर असर

अमेरिकी बाजार से आने वाले सूखे मेवे और अन्य खाद्य उत्पादों पर भी रियायतें दी गई हैं:

  • बादाम और पिस्ता: इन पर लगने वाले शुल्क को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा।

  • खाद्य तेल: अमेरिकी सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क कम होगा।

  • अन्य उत्पाद: ताजे फल, प्रोसेस्ड फल, वाइन, स्पिरिट और कॉस्मेटिक उत्पादों पर भी टैरिफ कम किए जाने का प्रस्ताव है।

घरेलू हितों की पूरी सुरक्षा

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि ‘जीरो टैरिफ’ की रियायत केवल उन्हीं वस्तुओं पर दी गई है जिनका उत्पादन भारत में नहीं होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते से भारतीय किसानों और डेयरी क्षेत्र के हितों पर कोई आंच नहीं आएगी।

$500 अरब की बड़ी खरीद

इस समझौते के तहत भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के उत्पादों की खरीद करेगा। इसमें मुख्य रूप से कोकिंग कोल, ऊर्जा उत्पाद, विमान के पुर्जे और आईटी उत्पाद शामिल होंगे।

“हमने एक ऐसी सूची तैयार की है जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को लाभ मिले और घरेलू उद्योगों को कोई नुकसान न हो। यह समझौता दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति है।” > — पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री

अगला कदम: इस अंतरिम समझौते को कानूनी रूप देने की प्रक्रिया जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि 15 मार्च 2026 तक दोनों देश इस पर अंतिम हस्ताक्षर कर देंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ में कटौती के संकेत के बाद इस डील को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

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