बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव गुट को बड़ा झटका: अंधेरी पूर्व के कद्दावर नेता अशोक मिश्रा बीजेपी में शामिल
मुंबई | मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों की आहट के साथ ही सियासी गलियारों में दल-बदल का खेल तेज हो गया है। शनिवार (10 जनवरी) को उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) गुट को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अंधेरी पूर्व से पार्टी के उपविभाग प्रमुख और उत्तर भारतीय चेहरा अशोक मिश्रा ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में उन्होंने ‘वर्षा’ बंगले पर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
टिकट बंटवारे से बढ़ी नाराजगी
अशोक मिश्रा के इस्तीफे के पीछे मुख्य वजह आगामी बीएमसी चुनाव में टिकटों का बंटवारा बताया जा रहा है। मिश्रा का आरोप है कि पार्टी के लिए सालों तक खून-पसीना बहाने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा, “पार्टी नेताओं ने मुझे अंधेरी पूर्व से नगरसेवक पद के लिए बार-बार टिकट का आश्वासन दिया था, लेकिन अंतिम समय में एक अनजान चेहरे को मैदान में उतार दिया गया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर भारतीय होने के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया।
उत्तर भारतीय वोट बैंक में सेंधमारी
अशोक मिश्रा के बीजेपी में जाने से अंधेरी पूर्व के पंप हाउस, नागरदास रोड और मोगरापाड़ा जैसे इलाकों में उद्धव गुट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इन क्षेत्रों में उत्तर भारतीय मतदाताओं की बड़ी संख्या है और मिश्रा की वहां मजबूत पकड़ मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फेरबदल से यूबीटी सेना को केवल उत्तर भारतीय ही नहीं, बल्कि मराठी मतों का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि मिश्रा ने वहां युवाओं की एक समर्पित टीम तैयार की थी।
ठाकरे परिवार के रहे वफादार
अशोक मिश्रा का शिवसेना (अविभाजित) और ठाकरे परिवार के साथ पुराना नाता रहा है।
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2014 में प्रवेश: उन्होंने साल 2014 में शिवसेना का हाथ थामा था।
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चुनावी मेहनत: उन्होंने दिवंगत विधायक रमेश लटके, ऋतुजा लटके और सांसद गजानन कीर्तिकर की जीत सुनिश्चित करने के लिए 2014 से लेकर 2024 के लोकसभा व विधानसभा चुनावों में दिन-रात काम किया।
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सामाजिक प्रभाव: अंधेरी और जोगेश्वरी इलाकों में उन्होंने खेलकूद, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के जरिए पार्टी का ग्राफ काफी ऊंचा किया था।
बढ़ती नाराजगी ने बढ़ाई चिंता
मुंबई के लगभग हर वार्ड में इन दिनों टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। अशोक मिश्रा का पार्टी छोड़ना यूबीटी गुट के लिए एक चेतावनी की तरह है, क्योंकि चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही कार्यकर्ताओं का असंतोष चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
