मैकेनिकल इंजीनियर बने नागा संन्यासी, ‘बियॉन्ड थ्री’ के जरिए कर रहे असाध्य रोगों का इलाज
प्रयागराज | संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले में इस बार आस्था के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। जूना अखाड़े के श्री दत्तात्रेय सेवा समिति के शिविर में पहुंचे एक नागा संन्यासी, स्वामी आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज, इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण और चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। स्वामी जी की विशेषता यह है कि वह एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जिन्होंने भौतिक सुखों को त्यागकर सनातन धर्म की सेवा को अपना लक्ष्य बनाया है।
शिक्षा और साधना का समन्वय
मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले स्वामी आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज वर्तमान में दिल्ली में जूना अखाड़े के आश्रम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने न केवल इंजीनियरिंग की है, बल्कि बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) और बायोलॉजी (जीव विज्ञान) में भी विशेषज्ञता हासिल की है। स्वामी जी का मानना है कि केवल स्कूली शिक्षा से ‘विषय का ज्ञान’ (Subjective Knowledge) तो मिल सकता है, लेकिन ‘जीवन का ज्ञान’ केवल गुरु और अध्यात्म से ही संभव है।
‘बियॉन्ड थ्री’: बिना ऑपरेशन इलाज का दावा
स्वामी जी अपनी पैथी और संगठन “बियोंड थ्री” (Beyond Three) के माध्यम से लोगों की सेवा कर रहे हैं। उनका दावा है कि:
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वे बिना किसी ऑपरेशन और साइड इफेक्ट के पुराने से पुराने दर्द का इलाज करते हैं।
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जब आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां बेअसर हो जाती हैं, तब वे सनातन पद्धतियों और अपनी रिसर्च के जरिए मरीजों को स्वस्थ करते हैं।
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उन्होंने हिमालय की कंदराओं में रहते हुए 12 वर्षों तक बॉटनी और सनातन चिकित्सा पर गहन शोध किया है।
रोचक है संन्यास की राह
स्वामी जी के संन्यासी बनने का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। बचपन से ही अध्यात्म की ओर झुकाव होने के कारण वे चौथी और आठवीं कक्षा में ही घर से भाग गए थे। हालांकि, उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद वर्ष 2006 में स्थायी रूप से घर छोड़ दिया। 2007 में वे जूना अखाड़े के संपर्क में आए और संरक्षक महंत हरी गिरी जी महाराज से दीक्षा लेकर सनातनी सेवा में जुट गए।
“दाल-रोटी के लिए शिक्षा जरूरी है, लेकिन संपूर्ण विकास के लिए आध्यात्मिक गुरु का होना अनिवार्य है। गुरु-शिष्य परंपरा ही हमारी संस्कृति और प्रकृति का संरक्षण कर सकती है।” — स्वामी आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज
भक्तों की उमड़ रही भीड़
जिस तरह 2025 के महाकुंभ में ‘आईआईटी बाबा’ चर्चा में रहे थे, उसी तरह माघ मेले में ‘इंजीनियर स्वामी जी’ को देखने और उनसे परामर्श लेने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं। उनके शिविर में धर्म चर्चा के साथ-साथ स्वास्थ्य और जीवन प्रबंधन के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।
