ईरान में कोहराम: प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के आदेश, 217 की मौत
तेहरान/नई दिल्ली: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक खूनी मोड़ ले लिया है। देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे नागरिकों पर अब सीधे गोलियां चलाई जा रही हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के आदेश के बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर मशीन गन से अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें दावा किया जा रहा है कि अब तक 217 लोगों की जान जा चुकी है।
अस्पतालों से डराने वाले आंकड़े
एक स्थानीय डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर ‘टाइम’ पत्रिका को बताया कि राजधानी तेहरान के केवल छह अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। मृतकों में बड़ी संख्या युवाओं की है। बताया जा रहा है कि उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा बलों ने भीड़ पर मशीन गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, वाशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी ने अब तक 63 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है।
ट्रंप और खामेनेई के बीच जुबानी जंग
ईरान की इस हिंसा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारता है, तो अमेरिका उन्हें बचाने आएगा। हम पूरी तरह तैयार हैं।”
वहीं, अयातुल्ला खामेनेई ने ट्रंप की चुनौती को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ‘उपद्रवियों’ के सामने नहीं झुकेगा। सरकारी टेलीविजन पर चेतावनी दी गई है कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। एक सैन्य अधिकारी ने माता-पिता को आगाह करते हुए यहाँ तक कह दिया, “अपने बच्चों को घर में रखें, अगर उन्हें गोली लग जाए तो शिकायत मत करना।”
विद्रोह की जड़: आर्थिक बदहाली
ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैले इस आक्रोश के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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आकाश छूती महंगाई: दैनिक जरूरतों की चीजों के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं।
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गिरती मुद्रा: ईरानी रियाल की कीमत में भारी गिरावट ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
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अमेरिकी प्रतिबंध: तेल भंडार होने के बावजूद प्रतिबंधों के कारण ईरान व्यापार नहीं कर पा रहा है।
एक नजर में वर्तमान स्थिति
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| दावा की गई मौतें | 217 (स्थानीय डॉक्टर के अनुसार) |
| पुष्टि की गई मौतें | 63 (मानवाधिकार एजेंसी के अनुसार) |
| प्रभावित क्षेत्र | ईरान के सभी 31 प्रांत |
| इंटरनेट स्थिति | देश भर में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप |
| क्षेत्रीय सुरक्षा | खाड़ी देशों में 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात |
