रेल अधिकारी अब नहीं पहनेंगे अंग्रेजों के जमाने का ‘बंद गले का काला सूट’

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Indian Railways

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने औपनिवेशिक मानसिकता को पूरी तरह पीछे छोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा ‘बंद गले का काला सूट’ अब रेलवे का आधिकारिक औपचारिक पहनावा (Formal Dress) नहीं रहेगा। उन्होंने रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से औपनिवेशिक सोच को जड़ से खत्म करने का आह्वान किया है।

ड्रेस कोड में बड़ा बदलाव

शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए रेलमंत्री ने कहा, “औपनिवेशिक मानसिकता को खोज-खोजकर हटाना होगा, चाहे वह काम का तरीका हो या पहनावा।” अब तक यह काला सूट निरीक्षण, परेड और विशेष समारोहों में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहना जाता था। हालांकि, यह ग्रुप-डी, ट्रैकमैन और तकनीकी स्टाफ पर लागू नहीं था।

मिशन 2026: ’52 हफ्ते, 52 सुधार’

रेलमंत्री ने वर्ष 2026 के लिए रेलवे का रोडमैप पेश करते हुए छह बड़े संकल्प रखे। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष “52 हफ्ते, 52 सुधार” के लक्ष्य के साथ सेवा, उत्पादन, निर्माण और सुविधाओं में व्यापक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने जोर दिया कि रेलवे को अब पिछले सौ वर्षों की कमी दूर करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक को खुले मन से अपनाना होगा।

नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

रेलवे में नई तकनीक लाने के लिए सरकार ने बड़े प्रोत्साहन की घोषणा की है:

  • इनोवेशन पोर्टल: जल्द ही एक पोर्टल लॉन्च होगा जहाँ रेलवे अपनी समस्याओं को रखेगा और स्टार्टअप्स उनके समाधान देंगे।

  • वित्तीय सहायता: प्रोजेक्ट ट्रायल के लिए रेलवे 50% लागत वहन करेगा और 1.50 करोड़ रुपये तक का अनुदान (Grant) दिया जाएगा।

  • इनाम: अगले वर्ष 12 नए इनोवेशन अवार्ड दिए जाएंगे, जिसमें विजेता टीम को 1 लाख रुपये तक का पुरस्कार मिलेगा।

  • सीरीज ऑर्डर: यदि स्टार्टअप की तकनीक सफल रहती है, तो रेलवे अगले चार वर्षों तक सीरीज ऑर्डर भी देगा।

सुरक्षा और ट्रैक मेंटेनेंस पर ‘जीरो टॉलरेंस’

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के मामले में कोई भी ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। ट्रैक मेंटेनेंस की कार्यप्रणाली को नए स्तर पर ले जाने के लिए व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा कार्यबल और आत्मविश्वास के साथ भारतीय रेल 2047 तक ‘विकसित भारत’ का मजबूत स्तंभ बनेगी।

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