आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: अस्पतालों में डॉग्स की अनुमति नहीं, बच्चों पर हमलों के वीडियो ‘अनगिनत’
नई दिल्ली | देश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और सार्वजनिक सुरक्षा बनाम पशु कल्याण के जटिल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। जस्टिस जे. मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि दलीलें जमीनी हकीकत के करीब होनी चाहिए। कोर्ट ने अस्पतालों जैसे संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों को अनुमति देने के सुझाव को पूरी तरह खारिज कर दिया।
‘संवैधानिक सीमाओं का है प्रश्न’
सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि यह मामला अब केवल कुत्तों या इंसानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह संवैधानिक शक्तियों, उनकी सीमाओं और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन का प्रश्न है। वहीं, डॉग राइट्स संगठन की ओर से पेश वकील राज शेखर राव ने ‘CSVR मॉडल’ की वकालत करते हुए संस्थानों को समस्या सुलझाने के लिए 6 महीने का समय देने की मांग की।
हमलों के वीडियो का जिक्र
सुनवाई के दौरान अदालत ने आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर किए जा रहे हमलों पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यूट्यूब पर ऐसे ‘अनगिनत’ वीडियो मौजूद हैं, जिनमें कुत्तों को मासूम बच्चों और असहाय बुजुर्गों पर जानलेवा हमला करते देखा जा सकता है। जस्टिस मेहता ने कहा कि पशु प्रेम और सुरक्षा के बीच एक रेखा खींचनी होगी।
समाधान के लिए पेश किए गए 6 अहम सुझाव
सीनियर वकील शादान फरासत ने अदालत के सामने इस समस्या से निपटने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना पेश की, जिसमें निम्नलिखित 6 बिंदु शामिल हैं:
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संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: अस्पतालों और मुख्य सड़कों को पूरी तरह से आवारा कुत्तों से मुक्त किया जाए।
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फीडिंग स्पॉट्स: कुत्तों को खाना खिलाने वालों (Feeders) और खिलाने के स्थानों की स्पष्ट पहचान की जाए।
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ABC नियमों का पालन: ‘Animal Birth Control’ (नसबंदी) नियमों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: राज्य सरकारों को नसबंदी और टीकाकरण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना चाहिए।
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समन्वय: नगर निगम और राज्य सरकार के विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जाए।
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जवाबदेही: हर नगर क्षेत्र में एक जवाबदेह अधिकारी की नियुक्ति हो, जो शिकायतों का निपटारा करे।
कानून-व्यवस्था के मामले में हस्तक्षेप से इनकार
कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें महिला डॉग फीडरों को ‘एंटी-फीडर विजिलेंट’ द्वारा परेशान किए जाने के आरोप लगाए गए थे। अदालत ने कहा कि यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था का मामला है, जिसकी जांच करना इस पीठ के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई अब मंगलवार को होगी, जिसमें अन्य पक्षों के सुझावों और सरकार की कार्ययोजना पर विचार किया जा सकता है।
एक नज़र में मुख्य बिंदु:
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अस्पताल और मुख्य सड़कें: कुत्तों से मुक्त रखने का सुझाव।
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डैशबोर्ड: सीनियर वकील माधवी दीवान ने राज्य स्तर पर ऑनलाइन ट्रैकिंग डैशबोर्ड बनाने का सुझाव दिया।
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जमीनी हकीकत: कोर्ट ने कहा कि पशु प्रेम के नाम पर सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
