शी जिनपिंग का नए साल पर कड़ा संदेश: ताइवान का एकीकरण ‘अपरिहार्य’

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बीजिंग | चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2026 के नववर्ष के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक घोषणाएं की हैं। बुधवार को राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन के साथ ताइवान का पुन: एकीकरण अब “अपरिहार्य” है और इसे कोई भी शक्ति रोक नहीं सकती है। इसके साथ ही, उन्होंने भारत की सीमा के निकट ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्माणाधीन दुनिया के सबसे बड़े बांध को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की।

ताइवान एकीकरण: “समय की मांग और अपरिहार्य”

शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में ताइवान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले लोग एक ही परिवार के हैं और उनके बीच रक्त का संबंध है।

  • पुन: एकीकरण: जिनपिंग ने कहा, “हमारी मातृभूमि का पुन: एकीकरण समय की मांग है और इसे रोका नहीं जा सकता”।

  • सैन्य गतिविधियां: यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन ने पिछले तीन दिनों में ताइवान द्वीप के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है। चीन लगातार ताइवान को अपने मुख्य भूभाग का हिस्सा होने का दावा करता रहा है।

ब्रह्मपुत्र पर $170 अरब की महा-परियोजना

राष्ट्रपति जिनपिंग ने तिब्बत क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग त्सांगपो) के निचले हिस्से में एक विशाल जलविद्युत परियोजना के निर्माण की औपचारिक शुरुआत की पुष्टि की है।

  • परियोजना की लागत: इस बांध के निर्माण पर चीन लगभग 170 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर रहा है।

  • लोकेशन: यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के बेहद करीब स्थित है।

  • भारत और बांग्लादेश की चिंता: इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर भारत और बांग्लादेश जैसे निचले प्रवाह वाले देशों में गहरी चिंता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बांध से जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है और बाढ़ या पानी की कमी जैसी आपदाओं की आशंका बढ़ सकती है।

रक्षा और तकनीक में बढ़ती शक्ति

अपने संदेश में जिनपिंग ने केवल क्षेत्रीय दावों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने चीन की आर्थिक, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति को भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने अपनी सेना की बढ़ती रक्षा क्षमताओं को देश के गौरव और सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।

इस संबोधन ने एक बार फिर दक्षिण एशिया और वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, विशेषकर ताइवान और ब्रह्मपुत्र नदी के जल अधिकारों को लेकर तनाव बढ़ने की संभावना है।