कंगाल पाकिस्तान में ‘महा-सेल’: कर्ज चुकाने के लिए बेची जाएंगी राष्ट्रीय संपत्तियां

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134 अरब डॉलर के कर्ज में डूबा पड़ोसी देश; पीआईए के बाद अब बैंक, बिजली कंपनियां और न्यूयॉर्क का होटल भी निजी हाथों में देने की तैयारी

इस्लामाबाद/नई दिल्ली |आर्थिक बदहाली और 134 अरब डॉलर के भारी-भरकम विदेशी कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब खुद को दिवालिया होने से बचाने के लिए ‘करो या मरो’ का रास्ता चुन लिया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने देश की प्रमुख सरकारी संस्थाओं के निजीकरण की गति तेज कर दी है। सरकारी एयरलाइन पीआईए (PIA) के बाद अब सरकार ने बिजली, बैंकिंग, ऊर्जा और बीमा सहित पांच प्रमुख क्षेत्रों के निजीकरण के लिए ‘एजेंडा-5’ योजना तैयार की है।

2026 तक पूरी होगी संपत्तियों की बिक्री

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, बिजली वितरण, बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं को 2026 के अंत से पहले निजी खरीदारों को सौंप दिया जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह पुनर्गठन सफल नहीं हुआ, तो पाकिस्तान के हालात भी श्रीलंका जैसे ऋण संकट वाले हो सकते हैं। वर्तमान में पाकिस्तान सरकार केवल दैनिक खर्चों को चलाने के लिए विदेशी कर्ज ले रही है।

‘एजेंडा-5’: इन 5 क्षेत्रों का होगा सौदा

अधिकारियों ने अगले 12 महीनों के भीतर निजीकरण के लिए पांच मुख्य समूहों की पहचान की है:

  1. बिजली वितरण कंपनियां (DISCOs): बिजली चोरी और घाटे से निपटने के लिए IESCO (इस्लामाबाद) और FESCO (फैसलाबाद) जैसी कंपनियों को निजी ऑपरेटरों को सौंपा जाएगा।

  2. बैंकिंग क्षेत्र: ‘फर्स्ट वुमन बैंक लिमिटेड’ और ‘ज़राई ताराकियाती बैंक लिमिटेड’ (ZTBL) को भी बिक्री के लिए प्रस्तावित किया गया है।

  3. होटल और अचल संपत्ति: न्यूयॉर्क स्थित ऐतिहासिक रूजवेल्ट होटल और लाहौर के सर्विसेज इंटरनेशनल होटल को बेचकर विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की योजना है।

  4. ऊर्जा उत्पादन (GENCOs): जामशोरो और लखदा जैसे घाटे में चल रहे सार्वजनिक बिजली संयंत्रों का विनिवेश किया जाएगा।

  5. बीमा और रिटेल: स्टेट लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन और देशव्यापी उपयोगिता स्टोर नेटवर्क (Utility Stores) को भी इस सूची में शामिल किया गया है।

कुप्रबंधन या मजबूरी? देश में छिड़ी बहस

सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की देखरेख में चल रहे इस अभियान ने पाकिस्तान में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। समर्थकों का तर्क है कि अर्थव्यवस्था को बचाने का यही एकमात्र रास्ता है, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह सरकार की विफलता है। विरोधियों का आरोप है कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को दांव पर लगाकर राष्ट्रीय संपत्तियां बेची जा रही हैं।

प्रमुख आंकड़े:

  • कुल विदेशी कर्ज: लगभग 134 बिलियन डॉलर

  • निजीकरण की समय सीमा: दिसंबर 2026

  • प्रमुख लक्ष्य: राजस्व बढ़ाना और सार्वजनिक खर्च को कम करना।

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