दिसंबर 2026 तक सभी 15 लाख उपभोक्ता होंगे प्री-पेड

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Prepaid smart meters

लखनऊ | मुख्य संवाददाता। राजधानी के बिजली उपभोक्ताओं को मीटर रीडिंग और खराबी जैसी समस्याओं से जल्द निजात मिलने वाली है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (MVVNL) ने शहर के सभी उपभोक्ताओं के परिसर में एक ही कंपनी के माध्यम से आधुनिक प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत चार साल पहले लगाए गए पुराने स्मार्ट मीटरों को हटाकर नए अपडेटेड मीटर लगाए जाएंगे।

दो कंपनियों के फेर में फंसी थी व्यवस्था

करीब चार साल पहले एक निजी कंपनी के माध्यम से दो लाख उपभोक्ताओं के यहाँ स्मार्ट मीटर लगाए गए थे। बाद में अन्य उपभोक्ताओं के लिए दूसरी कंपनी के साथ अनुबंध किया गया। शहर में दो अलग-अलग कंपनियों के मीटर होने से रीडिंग, मरम्मत और सॉफ्टवेयर अपडेट करने में गंभीर तकनीकी समस्याएं आने लगीं। पहली कंपनी ने पुराने समझौतों का हवाला देते हुए सॉफ्टवेयर अपडेट करने से मना कर दिया था, जिससे उपभोक्ताओं और विभागीय अभियंताओं दोनों को परेशानी हो रही थी।

नि:शुल्क बदले जाएंगे सवा तीन लाख मीटर

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (वाणिज्य) योगेश कुमार ने बताया कि लखनऊ और बरेली में करीब सवा तीन लाख उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदले जाएंगे। नए प्री-पेड स्मार्ट मीटर पूरी तरह अपडेटेड होंगे और इसके लिए उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

  • शुरुआती चरण: अमौसी, गोमती नगर और लखनऊ मध्य जोन के करीब 80 हजार मीटर बदलने का काम शुरू हो चुका है।

  • जानकीपुरम जोन: यहाँ भी अभियंताओं ने मीटर बदलने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

दिसंबर 2026 तक का लक्ष्य

अभियंताओं के अनुसार, लखनऊ के कुल 15 लाख उपभोक्ताओं में से 11 लाख से अधिक के यहाँ पहले ही स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। विभाग की योजना है कि:

  1. गर्मी से पहले: सभी उपभोक्ताओं के परिसर में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाए।

  2. चरणबद्ध लक्ष्य: दिसंबर 2026 तक राजधानी के सभी 15 लाख उपभोक्ताओं को पूरी तरह प्री-पेड व्यवस्था पर शिफ्ट कर दिया जाए।

‘पहले रिचार्ज, फिर बिजली’ का नया मॉडल

नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को मोबाइल की तरह पहले अपना मीटर रिचार्ज करना होगा, उसके बाद ही वे बिजली का उपयोग कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि प्री-पेड व्यवस्था से राजस्व समय पर प्राप्त होगा, जिससे बिजली विभाग के इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक आधुनिक और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए यह नियम अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है।

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