पाकिस्तान ने पहली बार कबूली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की मार
उप प्रधानमंत्री इशाक डार का बड़ा कबूलनामा- हमले में सैन्य ठिकाने तबाह और जवान हुए घायल; भारत ने 11 एयरबेसों को बनाया था निशाना
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पाकिस्तान ने आखिरकार इस साल मई में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हुए भारी नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि भारतीय ड्रोन रावलपिंडी के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नूर खान एयर बेस पर हमला करने में सफल रहे थे।
36 घंटे में भारत ने भेजे 80 ड्रोन
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इशाक डार ने बताया कि भारत ने बेहद कम समय में पाकिस्तानी सीमा के भीतर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे थे। उन्होंने दावा किया कि 36 घंटों के भीतर कम से कम 80 भारतीय ड्रोन ने सीमा पार की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना ने उनमें से 79 ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन एक ड्रोन नूर खान एयर बेस के सैन्य ठिकाने पर सटीक निशाना साधने में कामयाब रहा, जिससे वहां तैनात सुरक्षाकर्मी घायल हुए और सैन्य प्रतिष्ठानों को गंभीर नुकसान पहुंचा।
क्यों अहम है नूर खान एयरबेस?
रावलपिंडी में स्थित नूर खान एयरबेस पाकिस्तान का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा माना जाता है:
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रणनीतिक कमान: यहाँ पाकिस्तानी सेना की स्ट्रैटजिक कमांड का मुख्यालय है।
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परमाणु हथियार: रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की परमाणु मिसाइलों सहित कई प्रमुख घातक हथियार इसी बेस पर तैनात हैं।
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VVIP आवाजाही: पाकिस्तानी सेना प्रमुख, वायुसेना प्रमुख और वरिष्ठ नागरिक नेता इसी एयरबेस का उपयोग करते हैं। साथ ही, विदेशी वीवीआईपी मेहमानों की लैंडिंग भी यहीं होती है।
ऑपरेशन सिंदूर: 11 एयरबेसों पर बरपा था कहर
भारत ने यह कार्रवाई 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई के शुरुआती हफ्ते में की थी। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने नूर खान एयरबेस के अलावा पाकिस्तान के 10 अन्य प्रमुख एयरबेसों को निशाना बनाया था। इनमें सरगोधा, रफीकी, जैकोबाबाद और मुरीदके जैसे महत्वपूर्ण ठिकाने शामिल थे। इन हवाई हमलों में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान, रडार साइट, रनवे और हैंगर पूरी तरह नष्ट हो गए थे।
9 मई की रात हुई थी आपात बैठक
इशाक डार ने खुलासा किया कि हमले की गंभीरता को देखते हुए 9 मई की रात प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में सैन्य और नागरिक नेतृत्व की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि 10 मई की सुबह नूर खान एयरबेस पर हमला होना पाकिस्तानी सुरक्षा के लिए एक बड़ी चूक और भारत की एक सोची-समझी सैन्य कार्रवाई थी।
