जी-रामजी अधिनियम: ग्रामीण भारत में बेरोजगारी भत्ता अब ‘मदद’ नहीं, ‘कानूनी अधिकार’

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आवेदन के 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिला तो राज्य सरकार को देना होगा भत्ता; वित्तीय वर्ष में 125 दिन के रोजगार की गारंटी

नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में रोजगार की अनिश्चितता को समाप्त करने और परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में ‘जी-रामजी अधिनियम’ (विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन-ग्रामीण) एक बड़े भरोसे के रूप में उभरा है। इस कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पहली बार बेरोजगारी भत्ते को केवल सरकारी सहायता के बजाय एक स्पष्ट और बाध्यकारी कानूनी अधिकार के रूप में परिभाषित किया गया है।

15 दिनों की समय-सीमा तय

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई पात्र ग्रामीण परिवार रोजगार की मांग करता है, तो उसे काम उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। कानून में इसके लिए 15 दिनों की कड़ी समय-सीमा निर्धारित की गई है। यदि आवेदन की तारीख या काम मांगे जाने की तिथि से 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो आवेदक स्वतः ही दैनिक बेरोजगारी भत्ते का हकदार हो जाएगा। इस भत्ते के भुगतान की जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य सरकार की होगी।

भत्ते की दरें और नियम

राज्य सरकारों को भत्ते की दर तय करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन अधिनियम ने इसकी न्यूनतम सीमा भी स्पष्ट कर दी है ताकि मनमानी की गुंजाइश न रहे:

  • पहले 30 दिन: वित्तीय वर्ष के शुरुआती 30 दिनों के लिए भत्ता संबंधित क्षेत्र की निर्धारित मजदूरी दर के कम से कम एक-चौथाई (1/4) के बराबर होगा।

  • अगली अवधि: 30 दिनों के बाद की अवधि के लिए यह भत्ता मजदूरी दर का आधा (1/2) या उससे अधिक होना अनिवार्य है।

कब नहीं मिलेगा भत्ता?

कानून में उन स्थितियों को भी स्पष्ट किया गया है जिनमें राज्य सरकार की भत्ता देने की जिम्मेदारी समाप्त हो जाएगी:

  • यदि ग्राम पंचायत या सक्षम अधिकारी द्वारा काम पर रिपोर्ट करने का निर्देश देने के बाद भी आवेदक काम पर नहीं जाता।

  • यदि परिवार के किसी अन्य वयस्क सदस्य को रोजगार मिल जाता है।

  • यदि आवेदक स्वयं प्रस्तावित काम स्वीकार करने से इनकार कर देता है।

125 दिन की अधिकतम सीमा

अधिनियम के तहत किसी भी वित्तीय वर्ष में एक परिवार को अधिकतम 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। यदि किसी परिवार को 125 दिन का काम मिल चुका है, तो वह अतिरिक्त भत्ते का दावा नहीं कर सकेगा। साथ ही, यदि मिली हुई मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते की कुल राशि 125 दिन की मजदूरी के बराबर हो जाती है, तो भी अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाएगा।

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