लखनऊ में बांग्लादेशियों की पहचान शुरू, CM Yogi ने कहा- ‘घुसपैठियों को बाहर किया जाए’

0
cm yogi

लखनऊ। राजधानी में सफाई कार्य और कूड़ा उठाने में लगे कथित बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया तेज हो गई है। नगर निगम और पुलिस अब इनकी वास्तविकता एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) नंबर और आधार सत्यापन के आधार पर परख रहे हैं।

मालूम हो कि असम सरकार द्वारा तैयार एनआरसी में प्रत्येक नागरिक का पारिवारिक रिकॉर्ड दर्ज है, जिसमें उनके पूर्वजों तक का विवरण मौजूद है। इसी आधार पर पता लगाया जा रहा है कि लखनऊ में कार्यरत व्यक्ति वास्तव में असम का रहने वाला है या बांग्लादेश से अवैध रूप से घुसपैठ कर आया है।

थानों में हो रहा दस्तावेजों का मिलान

नगर निगम को अभी तक सभी लोगों के एनआरसी नंबर उपलब्ध नहीं हुए हैं। इसलिए पुलिस इन कर्मचारियों को थानों में बुलाकर एनआरसी नंबर, आधार कार्ड, और अन्य पहचान पत्रों की जाँच कर रही है। जाँच में एनआरसी नंबर डालते ही कई कर्मियों की पृष्ठभूमि स्पष्ट हो जा रही है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अवैध घुसपैठियों की पहचान और कार्रवाई के निर्देश के बाद लखनऊ में भी यह अभियान तेज हुआ है। पिछले वर्ष इंदिरानगर में कथित बांग्लादेशियों द्वारा नगर निगम टीम पर हमले की घटना के बाद मामला और गंभीर हो गया था। हाल ही में महापौर सुषमा खर्कवाल ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर अवैध बस्तियों को खाली कराया था। 19 नवंबर को भी महापौर ने कई इलाकों में जाकर दस्तावेजों की जांच कराई और अधिकारियों को निर्देश दिए कि घुसपैठ से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए।

कई इलाकों में ज्यादा संख्या में मिले संदिग्ध

नगर निगम की जांच में— अलीगंज, गोमतीनगर में ऐसे लोगों की संख्या काफी पाई गई है, जबकि जानकीपुरम क्षेत्र में खाली भूखंडों पर कई अवैध बस्तियाँ मिली हैं। अधिकांश लोग खुद को असम का निवासी बताते हैं और आधार कार्ड भी दिखाते हैं, लेकिन पुलिस अब एनआरसी मिलान से वास्तविकता जांच रही है।

पूर्व डीजीपी ने भी जताई थी चिंता

पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं राज्यसभा सदस्य बृजलाल पहले ही लखनऊ में कथित बांग्लादेशियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना था कि ये लोग असम के जिलों— बोंगाई, नलबाड़ी, बरपेटा और नौगांव—का निवासी बताते हैं, लेकिन पृष्ठभूमि जांच में इनके बांग्लादेशी होने की आशंका गहराती है। उन्होंने नगर निगम पर रोजगार देकर इन्हें संरक्षण देने और पुलिस पर लापरवाही का भी आरोप लगाया था।

पुलिस–नगर निगम में समन्वय बढ़ा

विवाद बढ़ने के बाद अब पुलिस ने नगर निगम से ऐसे सभी सफाई कर्मियों की विस्तृत सूची और दस्तावेजों की माँग की है। नगर निगम ने— एनआरसी नंबर, आधार, और अन्य पहचान पत्रों को संकलित कर पुलिस को उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *