भाजपा में बड़ी कार्रवाई: पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह सहित तीन दिग्गज नेता निलंबित

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा ने कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह, विधान पार्षद अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल को पार्टी से निलंबित कर दिया है। तीनों नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

आर.के. सिंह पर NDA सरकार के खिलाफ बयानबाजी का आरोप

पार्टी ने कहा है कि आर.के. सिंह ने लगातार भाजपा नेतृत्व एवं एनडीए सरकार के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियां कीं, विधानसभा चुनाव के दौरान ऊर्जा घोटाले और आदाणी को जमीन आवंटन को लेकर सरकार पर “62 हजार करोड़ के घोटाले” का आरोप लगाया, जिसे पार्टी लाइन के खिलाफ माना गया। भाजपा के अनुसार, इस तरह की बयानबाजी चुनावी माहौल में पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली थी।

अशोक और उषा अग्रवाल पर ‘भीतरघात’ का आरोप

विधान पार्षद अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने भाजपा उम्मीदवार व पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के खिलाफ अंदरखाने काम किया और एनडीए उम्मीदवार को हराने की कोशिश की। पार्टी की जांच में इसे स्पष्ट रूप से प्रमाणित माना गया।

भाजपा बोली—अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं

भाजपा मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा ने कहा कि तीनों नेता पिछले कुछ समय से संगठन के निर्णयों के विपरीत कदम उठा रहे थे, विपक्षी उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे थे, या आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ माहौल बना रहे थे। जांच के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबन का फैसला लिया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा—“भाजपा एक अनुशासित संगठन है। चुनावी दौर में कोई भी गतिविधि जो आधिकारिक लाइन से हटकर हो, वह सीधे पार्टी को कमजोर करती है। इसलिए कार्रवाई जरूरी थी।”

अंदरूनी असंतोष पर भी कसा शिकंजा

निरीक्षकों का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर उन नेताओं के लिए सख्त संदेश भी है जो असंतोष या निजी मतभेदों के कारण संगठन की रणनीति को प्रभावित करते हैं। विपक्ष ने इस कार्रवाई को “भाजपा में बढ़ती नाराजगी” का संकेत बताया, जबकि भाजपा का कहना है कि “मजबूत संगठन के लिए कड़ा अनुशासन आवश्यक है।”

भाजपा का स्पष्ट संदेश: चुनाव में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भाजपा नेतृत्व की चुनावी फोकस को मजबूत करने और अंदरूनी ढिलाई को रोकने की दिशा में बड़ा संकेत है।

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