लखनऊ। बाअदब, बाकायदा, बामुलायजा होशियार, खबरदार, लखनऊ कस्टम्स, CGST विभाग के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर, कानपुर के CGST कार्यालय में पधार रहे हैं। यह मुनादी लखनऊ से लेकर कानपुर तक CGST विभाग ने करवा दी है। साहब के आने की सूचना मिलते ही CGST कानपुर कार्यालय में तैयारियां जोरों पर हो रही हैं।

मुगल चले गए मुग़लया अंदाज नहीं गए, अंग्रेज चले गए अंग्रेजियत नहीं गयीl CGST एंड कस्टम्स विभाग में देश की सर्वाेच्च मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को पास करके, ऐसा लगता है कि IRS के रूप में लोकसेवक नहीं बल्कि मुगल बादशाह भर्ती होते हैं। जो बड़े नौकरशाह बनने के बाद खुद को जनता के सेवक से इतर शहंशाह समझने लगते हैं।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को और देश में स्थित सभी सरकारी विभागों को VVIP कल्चर से मुक्त कराने के लिए दिन रात एक करके विभिन्न कार्ययोजनाएं तैयार करते हैं। उन कार्य योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सालों से अपनी कैबिनेट टीम को लगाए हुए हैं। लखनऊ के CGST विभाग के IRS अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के VVIP कल्चर मुक्त भारत के सपने को धता बताकर प्रोटोकॉल, परेड़ और गार्ड ऑफ ऑनर के मज़े लूटने में लिप्त हैं।

CGST विभाग के इन उच्चाधिकारियों को अपने कनिष्ठ कर्मचारियों से काम नहीं बल्कि प्रोटोकॉल चाहिए होता है। बस मुगलकालीन सिजदा और पैबोस की कमी है।

ज्ञातहो कि कुछ दिनों पहले ही CGST लखनऊ ज़ोन मुख्यालय में नए प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर उमाशंकर ने जॉइन किया जो विभाग के कोच्चि ज़ोन से तबादला होकर लखनऊ आये हैं। चार्ज लेते ही बड़े साहिबान ने विभाग के कानपुर कार्यालय का अपना टूर लगवा दिया।

बड़े साहिबान ठहरे प्रोटोकॉल प्रेमी, जैसे ही ये बात कानपुर कार्यालय स्थित उच्च अधिकारियों को पता चली आनन-फानन में बड़े साहिबान को खुश करने के लिए उनके विजिट के दौरान कनिष्ठ कर्मचारियों को खाकी वर्दी पहिनने, और परेड़ के बहाने प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर को गार्ड ऑफ ऑनर देने की तैयारी शुरू कर दी और इसके लिए बाकायदा, बामुलायजा लिखित में बिना फ़ाइल नंबर के अलग-अलग दो आदेश जारी कर दिए।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभाग में 3 साल पुराना इतिहास दोहराया जा रहा हैl ऐसे ही मामले में आज के 3 साल पहले लखनऊ ज़ोन के अंर्तगत आने वाले CGST आगरा कमिश्नरेट के दो निरीक्षकों अकांत सोलंकी और कपिल चाहर को 5 मार्च 2019 को लखनऊ के तत्कालीन चीफ कमिश्नर राजीव टंडन के इशारे पर सस्पैंड किया गया था। अगले ही दिन 6 मार्च 2019 को इसके विरोध में विभाग के ग्रुप बी के सभी कर्मचारी एसोसिएशन ने चीफ कमिश्नर ऑफिस का घेराव कर लिया था और तत्कालीन चीफ कमिश्नर राजीव टंडन कार्यालय का घेराव कर धरना प्रदर्शन किया गया था। लगभग 14 घंटे की जद्दोजहद के बाद लखनऊ की भारी पुलिस फोर्स और कई प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यालय आकर एसोसिएशन के नेताओं से बातचीत करके रात को 1 बजे धरने को समाप्त करवाया था।

इसके बाद में कई जनप्रतिनिधियों ने इस मामले का संज्ञान लिया था। तत्कालीन लोक सभा सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा द्वारा परेड़ और गार्ड ऑफ ऑनर के ऊपर संसद में प्रश्न उठाया था। जिसके लिखित उत्तर में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि कस्टम्स और CGST विभाग में परेड़ और गार्ड ऑफ ऑनर का कोई प्रावधान नहीं है और न ही कभी परेड़ और गार्ड ऑफ ऑनर के लिए आदेश दिए जाते हैं।

लेकिन कानपुर से निकले इन लिखित आदेशों को देखकर लगता है कि CGST विभाग के उच्च अधिकारी भारत के संविधान, देश की सत्ता, संसद और वित्त मंत्री से भी ऊपर हैं और VVIP कल्चर को बंद करने के मूड में नहीं हैं।

गौरतलब है कि कस्टम्स और CGST विभाग में खाकी वर्दी पहिनने का भी कोई नियम, कानून और गाइडलाइन नहीं है फिर भी विभाग के उच्च अधिकारी खुद को VVIP दिखाने के लिए और अपने कनिष्ठ कर्मचारियों का शोषण करने के लिए और उनको नीचा दिखाने के लिए जबरन खाकी वर्दी पहनाकर लाइन में खड़ा करवाते हैं ताकि वे गलत के खिलाफ और अपने अधिकारों को मांगने के लिए आवाज न उठा सकें और उच्च अधिकारियों की मुगल सत्ता विभाग में कायम रहे।

सूत्रों से ये भी पता चला है कि बड़े साहब बड़े रसूख वाले बड़े शौक रखते हैं और अपनी निजी यात्राएं प्राइवेट चार्टर प्लेन से तय करते हैं। सोचने योग्य बात है कि कैसे एक वेतन भोगी सरकारी कर्मचारी प्राइवेट प्लेन में चल सकता है।

लखनऊ के कई सामाजिक संगठनों ने इस बन्दरनाच कार्यक्रम पर अपना विरोध दर्ज कराया है और चेतावनी दी है कि अगर CGST विभाग द्वारा VVIP कल्चर को बढ़ावा देने का ऐसा कोई कार्य किया गया तो इसके खिलाफ व्यापक धरना प्रदर्शन किया जायेगा।

 

 

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