बुलेट ट्रेन: समुद्र के नीचे बन रही देश की पहली अंडरसी टनल

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India’s Underwater Bullet Train Tunnel

मुंबई। भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में एक बड़ी उपलब्धि की ओर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के तहत महाराष्ट्र में देश की पहली समुद्र के नीचे बनने वाली रेलवे टनल का निर्माण किया जा रहा है। यह टनल ठाणे क्रीक (Thane Creek) के नीचे से गुजरेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद भारत आधुनिक रेल तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।

7 किलोमीटर तक समुद्र के नीचे होगी टनल

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के महाराष्ट्र वाले हिस्से में कुल 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत टनल बनाई जा रही है। इसमें करीब 7 किलोमीटर का हिस्सा ठाणे क्रीक के नीचे समुद्र के भीतर होगा।

यह टनल मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) से ठाणे के शिलफाटा तक बनेगी। समुद्र के नीचे बनने वाला यह हिस्सा भारत के किसी भी रेल कॉरिडोर की पहली अंडरसी टनल होगा।

3200 टन की मशीन से हो रही खुदाई

टनल निर्माण के लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरी TBM ने 18 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के सावली (घनसोली) से विक्रोली की दिशा में खुदाई शुरू की थी।

इस मशीन का वजन लगभग 3,200 टन है और इसके कटर हेड का व्यास 13.6 मीटर है। इसकी लंबाई लगभग 96 मीटर है। इतनी विशाल मशीन समुद्र के नीचे और कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में सुरंग बनाने का काम कर रही है।

जमीन से 25 से 57 मीटर नीचे बनेगी टनल

परियोजना के तहत टनल को जमीन और समुद्र की सतह से लगभग 25 से 57 मीटर नीचे बनाया जा रहा है। पारसिक पहाड़ी के नीचे इसका सबसे गहरा निर्माण बिंदु लगभग 114 मीटर तक होगा।

टनल के अंदर दो समानांतर रेलवे ट्रैक होंगे, जिन पर विपरीत दिशाओं में बुलेट ट्रेन चल सकेंगी।

पानी से बचाव के लिए खास तकनीक

समुद्र के नीचे टनल बनाने में पानी का रिसाव और जमीन की हलचल बड़ी चुनौती होती है। इससे निपटने के लिए टनल को पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाने की व्यवस्था की जा रही है।

निर्माण के दौरान जमीन की हलचल, आसपास की इमारतों और भूजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। टनल में पानी के प्रवेश को रोकने के लिए विशेष सील और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

508 किलोमीटर लंबा होगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं।

बुलेट ट्रेन को अधिकतम 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है।

जापान की तकनीक से तैयार हो रही परियोजना

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) कर रहा है। इसमें जापान की शिंकानसेन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। समुद्र के नीचे बनने वाली यह टनल भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।

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