अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप को झटका, डेमोक्रेट्स को बढ़त
वॉशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। रॉयटर्स-इप्सोस के ताजा सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग उनके अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब बनी हुई है। वहीं, कांग्रेस चुनाव में मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस में अपना बहुमत बरकरार रख पाती है या डेमोक्रेट्स उसे चुनौती देने में सफल होते हैं।
सर्वे में डेमोक्रेट्स को 8 प्रतिशत अंकों की बढ़त
रॉयटर्स-इप्सोस के पांच दिवसीय सर्वे के अनुसार, कांग्रेस चुनाव में 46 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देने की इच्छा जताई, जबकि 38 प्रतिशत मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन किया। इस तरह डेमोक्रेट्स को 8 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली है।
हालांकि, एक सप्ताह पहले हुए सर्वे में डेमोक्रेट्स की बढ़त 11 प्रतिशत अंकों की थी। नए सर्वे में यह अंतर घटकर 8 प्रतिशत अंक रह गया है। इसके बावजूद डेमोक्रेट्स की स्थिति रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले मजबूत दिखाई दे रही है।
32 प्रतिशत पर अटकी ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग
सर्वे के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज से केवल 32 प्रतिशत उत्तरदाता संतुष्ट दिखाई दिए। यह आंकड़ा पिछले सप्ताह के बराबर है और दो सप्ताह पहले दर्ज 31 प्रतिशत के उनके न्यूनतम स्तर से थोड़ा ही ऊपर है।
ट्रंप की लोकप्रियता में कमजोरी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर किसी राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग कम होने का अर्थ यह नहीं है कि उनकी पार्टी हर चुनावी क्षेत्र में हार जाएगी। वास्तविक परिणाम अलग-अलग राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर निर्भर करेंगे।
महंगाई और जीवन-यापन की लागत बना बड़ा मुद्दा
अमेरिकी मतदाताओं के लिए बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्च चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। सर्वे में 78 प्रतिशत लोगों ने कहा कि जीवन-यापन की बढ़ती लागत उनके वोट के फैसले में बेहद महत्वपूर्ण या सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस मुद्दे पर भी डेमोक्रेट्स को बढ़त मिली। सर्वे के अनुसार, 43 प्रतिशत मतदाताओं ने बढ़ती लागत से निपटने के मामले में डेमोक्रेटिक पार्टी पर अधिक भरोसा जताया, जबकि 32 प्रतिशत ने रिपब्लिकन पार्टी को बेहतर माना।
ईंधन की बढ़ती कीमतों और आर्थिक दबाव के बीच मतदाताओं की नाराजगी रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
स्वतंत्र मतदाताओं में भी ट्रंप के खिलाफ नाराजगी
सर्वे में स्वतंत्र मतदाताओं की राय भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती का संकेत देती है। पंजीकृत स्वतंत्र मतदाताओं में 50 प्रतिशत ने कहा कि कांग्रेस चुनाव में उनका वोट ट्रंप के विरोध में होगा। इसके मुकाबले केवल 13 प्रतिशत ने कहा कि उनका वोट ट्रंप के समर्थन में होगा, जबकि 33 प्रतिशत ने कहा कि राष्ट्रपति उनके मतदान के फैसले का प्रमुख कारण नहीं हैं।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ट्रंप की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी कांग्रेस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर टिकी नजरें
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने की संभावनाएं अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही हैं। वहीं, सीनेट में बहुमत हासिल करने की लड़ाई अधिक कठिन है, क्योंकि वहां कई राज्यों में मुकाबला कड़ा है।
यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के लिए कानून पारित कराना और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस में विपक्ष की ताकत बढ़ने से प्रशासन के फैसलों की जांच और निगरानी भी तेज हो सकती है।
ट्रंप के कार्यकाल के लिए अहम परीक्षा
मिडटर्म चुनाव को ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। हालांकि राष्ट्रपति का चुनाव इन मध्यावधि चुनावों में नहीं हो रहा, लेकिन कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने से उनके शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा प्रभावित हो सकती है।
डेमोक्रेट्स को उम्मीद है कि महंगाई, आर्थिक चिंताओं और ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में कमजोरी का फायदा उन्हें मिलेगा। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बचाए रखने की चुनौती है।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले आए सर्वे रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश कर रहे हैं। डेमोक्रेट्स को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़त मिली है, जबकि ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बनी हुई है। हालांकि, अंतिम तस्वीर चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
